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‘जिन्न उतारने’ के नाम पर नाबालिग से दुष्कर्म, हाईकोर्ट ने मौलवी की जमानत खारिज

नई दिल्‍ली- दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी एक मौलवी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि आरोपी ने परिवार के विश्वास और उनकी मजबूरी का गलत फायदा उठाया है, इसलिए उसे इस स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती।

मामला प्रेम नगर थाना क्षेत्र का है, जहां आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता लंबे समय से बीमार थी और परिवार को उस पर ‘जिन्न’ का साया होने का संदेह था। स्थानीय लोगों की सलाह पर परिवार आरोपी मौलवी के संपर्क में आया, जिसने झाड़-फूंक से इलाज का दावा किया।

आरोप है कि मौलवी ने एक दिन कथित रूप से ‘बुरी आत्मा निकालने’ के बहाने परिवार वालों को कमरे से बाहर भेज दिया और नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न किया। उसने पीड़िता को किसी को घटना बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी वर्ष 2019 से जेल में है और मुख्य गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। वहीं सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी ने अंधविश्वास और बच्ची की कमजोर मानसिक स्थिति का फायदा उठाकर अपराध किया।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ ने कहा कि पीड़िता ने अपने बयान में आरोपों को स्पष्ट रूप से दोहराया है और इस स्तर पर आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने टिप्पणी की कि विश्वास का इस प्रकार दुरुपयोग गंभीर अपराध की श्रेणी में आता हैै।

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