सीधी
सांसद ने लोकसभा में उठाया गौ-संरक्षण और गौ-संवर्धन केंद्र का मामला…

सांसद ने लोकसभा में उठाया गौ-संरक्षण और गौ-संवर्धन केंद्र का मामला…
केंद्रीय पशुपालन मंत्री ने दिया लिखित में दायित्वों का ब्यौरा…
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लोकसभा क्षेत्र सीधी के सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने देश के प्रत्येक जिले में गौ संरक्षण और गौ संवर्धन केंद्र की स्थापना के बारे में लोकसभा में मामले को उठाते हुए कार्यवाही की मांग की। पंचायती राज्य मंत्री और मत्स्यपालनए पशुपालन एवं डेयरी मंत्री भारत सरकार राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने लिखित में दायित्वों का ब्यौरा दिया है। लिखित जवाब में सीधी सांसद को बताया गया कि दिनांक 30 जुलाई 2025 को लोकसभा में शून्यकाल के दौरान आपके द्वारा उठाए गए अविलंबनीय लोक महत्व के देश के प्रत्येक जिले में गौ संरक्षण और गौ संवर्धन केंद्र की स्थापना के बारे में मामले को उठाया गया था। भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार पशुपालन राज्य सूची का विषय है। अत: गौवंशों के संरक्षण एवं पुनर्वास से संबंधित नीतियों का निर्माण एवं संसाधनों का आवंटन संबंधित राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कई राज्यों ने आवारा गोपशु की समस्या को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के लिए पहले से ही गोपशु आश्रय स्थल गौशालाएं/गोसदन/काजी हाउस स्थापित किए हैं। इसके अलावा पशु कू्ररता निवारण पीसीए अधिनियम 1960 के अनुसार पशुओं के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों का यह कर्तव्य है कि वे उनकी भलाई सुनिश्चित करें और अनावश्यक पीड़ा को रोकें। पशुओं के लिए पर्याप्त भोजन, पानी या आश्रय प्रदान न करना अधिनियम की धारा 11 (1) (एच) और (1) के तहत अपराध हैं, जिसे राज्य सरकारों को प्रभावी ढंग से लागू करना है। केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा गौशालाओं की स्थापना हेतु वर्तमान में कोई पृथक केंद्रीय योजना संचालित नहीं की जा रही है। हालांकि, इस विभाग ने आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिनांक 16 जुलाई 2025 को एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें राज्यों से आग्रह किया गया है कि वे अपने स्वयं के बजट से या पशु कल्याण संगठनों और गैर सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी में पशु आश्रय स्थल स्थापित करें और निरंतर कार्रवाई के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करें।
बेसहारा पशुओं की देखभाल के लिए अनुदान
केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय के अधीनस्थ भारतीय पशु कल्याण बोर्ड द्वारा आश्रय गृहों को अनुदान घटक के तहत असहाय, बीमार तथा बेसहारा पशुओं के संरक्षण, पुनर्वास तथा देखभाल के लिए स्थायी आश्रयगृहों की स्थापना हेतु पंजीकृत पशु कल्याण संगठनों, गौशालाओं एवं स्थानीय निकायों को सीमित तौर पर एकमुश्त अनुदान सहायता प्रदान की जाती है, बशर्ते कि संबंधित संगठन पशु कल्याण बोर्ड द्वारा निर्धारित मानदंडों को पूरा करते हों। साथ ही साथ केंद्र सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत सेक्स सॉटिंड सीमेन की कृत्रिम गर्भाधान तकनीक को भी लागू कर रही है जिससे लगभग 80-90 प्रतिशत की सफलता दर के साथ मादा पशु पैदा होंगे। एक बार यह प्रयास सफल हो जाने पर किसानों द्वारा छोड़े गए अवांछित नर पशुओं की संख्या स्वत: कम हो जाएगी।













