राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर बैढ़न में प्रमुख जन गोष्ठी आयोजित*
राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी का आह्वान

सिंगरौली-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत रविवार को बैढ़न स्थित होटल जीएस प्लाजा के सभागार में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े प्रबुद्धजनों, गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं मातृशक्तियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना, संगठन की भूमिका को रेखांकित करना तथा भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ किया गया, जिसके बाद मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. सुरेंद्र जी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्यप्रणाली, समाज निर्माण में उसकी भूमिका और भारतीय संस्कृति की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा और समाज जागरण का एक सतत अभियान है, जिसने पिछले सौ वर्षों में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का समय भी है।
अपने संबोधन में डॉ. सुरेंद्र जी ने संघ द्वारा चलाए जा रहे ‘पंच परिवर्तन’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली और नागरिक कर्तव्य जैसे विषय आज के समय में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका समझते हुए सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आह्वान किया कि वे भारतीय संस्कारों और सेवा भाव को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं तथा समाज और राष्ट्र के विकास में योगदान दें। साथ ही प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में भी जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रबुद्धजनों ने डॉ. सुरेंद्र जी के विचारों को गंभीरता से सुना और कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से समाज में सकारात्मक सोच और राष्ट्रीय भावना को नई ऊर्जा मिलती है।
पूरे कार्यक्रम का वातावरण राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक गौरव के भाव से ओत-प्रोत रहा। अंत में सभी उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया, जिसके बाद स्वल्पाहार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
इस आयोजन को लेकर उपस्थित लोगों में उत्साह देखने को मिला और इसे समाज को जोड़ने वाला एक सार्थक प्रयास बताया गया।













