भारत के एआई युद्धक विमान “काल भैरव” की यूरोप में एंट्री, पुर्तगाल की कंपनी से हुआ बड़ा समझौता

नई दिल्ली। भारत के रक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर बड़ी सफलता मिली है। भारतीय एआई वॉरफेयर कंपनी FWDA ने घोषणा की है कि उसका स्वदेशी स्वायत्त युद्धक विमान “काल भैरव” अब यूरोप में भी निर्मित किया जाएगा। इसके लिए कंपनी ने पुर्तगाल की रक्षा तकनीक कंपनी SKETCHPIXEL के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इसे भारत की रक्षा तकनीक और स्वदेशी सैन्य नवाचार के लिए बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह पहली बार है जब भारत में विकसित किसी एआई आधारित कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्लेटफॉर्म को यूरोपीय रक्षा विनिर्माण नेटवर्क में शामिल किया गया है। यह साझेदारी ऐसे समय सामने आई है जब भारत वैश्विक रक्षा निर्यातक और रक्षा निर्माण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
जानकारी के अनुसार “काल भैरव” को भारत की अगली पीढ़ी की स्वायत्त युद्ध प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। इसकी यूरोप में मैन्युफैक्चरिंग शुरू होने से भारतीय रक्षा तकनीक की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी। पुर्तगाल की कंपनी एसकेचपिक्सल आधुनिक लड़ाकू विमानों के लिए उन्नत सिमुलेशन सिस्टम विकसित करने के लिए जानी जाती है। कंपनी पहले भी F-16 Fighting Falcon जैसे लड़ाकू विमानों के लिए सिमुलेशन तकनीक तैयार कर चुकी है।
अब यह कंपनी “काल भैरव” परियोजना में सिमुलेशन तकनीक, एआई इंटीग्रेशन सिस्टम, संचार नेटवर्क और इंटरऑपरेबिलिटी क्षमता उपलब्ध कराएगी। हालांकि विमान की स्वायत्त नियंत्रण प्रणाली और एयरफ्रेम डिजाइन से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार भारतीय कंपनी एफडब्ल्यूडीए के पास ही रहेंगे। इसे भारत के लिए बड़ी रणनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
“काल भैरव” को मध्यम ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भरने वाले स्वायत्त युद्धक विमान के रूप में डिजाइन किया गया है। बताया गया है कि यह विमान लगभग 3000 किलोमीटर की रेंज के साथ 30 घंटे से अधिक समय तक लगातार संचालन कर सकता है। इसमें एआई आधारित लक्ष्य पहचान प्रणाली, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन नेटवर्क और स्वॉर्म कोऑर्डिनेशन जैसी आधुनिक क्षमताएं मौजूद हैं।
एफडब्ल्यूडीए के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Suhas Tejaskanda ने इस समझौते को भारतीय रक्षा नवाचार के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया अब भारतीय एआई आधारित युद्ध तकनीकों में गंभीर रुचि दिखा रही है और यह साझेदारी इस बात का प्रमाण है कि भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक अब वैश्विक निर्माण नेटवर्क का हिस्सा बनने लगी है।
वहीं एसकेचपिक्सल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Miguel Abrue ने कहा कि दोनों कंपनियों की तकनीकी विशेषज्ञता मिलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की युद्धक तकनीक विकसित करेगी। उनके अनुसार विमान की संरचनात्मक डिजाइन, फर्मवेयर विकास, कम्युनिकेशन सिस्टम और सुरक्षा सत्यापन जैसी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं संयुक्त रूप से विकसित की जाएंगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत के “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियान को नई मजबूती दे सकती है। आधुनिक युद्ध तेजी से एआई, स्वायत्त प्रणालियों और ड्रोन तकनीक की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में “काल भैरव” परियोजना को भारत की रणनीतिक और तकनीकी क्षमता का बड़ा प्रतीक माना जा रहा है।













