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कमल हासन की फिल्म इंडस्ट्री को सलाह, फिजूलखर्ची छोड़ें, भारतीय लोकेशनों को दें प्राथमिकता

नई दिल्ली। भारतीय फिल्म उद्योग के दिग्गज अभिनेता और राजनेता Kamal Haasan ने देश की फिल्म इंडस्ट्री को लेकर बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार को जारी अपने खुले पत्र में उन्होंने फिल्म उद्योग से अपील की कि बदलते वैश्विक हालात और बढ़ती आर्थिक चुनौतियों के बीच फिल्म निर्माण में व्यावहारिक, टिकाऊ और जिम्मेदार तरीके अपनाए जाएं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अनावश्यक खर्चों में कटौती कर अधिक अनुशासित और प्रभावी कार्यप्रणाली अपनाने की जरूरत है।

कमल हासन ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक दबाव का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। ऊर्जा, परिवहन, व्यापार और उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका असर अब भारतीय फिल्म उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। उनके अनुसार ईंधन, लॉजिस्टिक्स और प्रोडक्शन खर्च बढ़ने से फिल्मों का बजट लगातार भारी होता जा रहा है, जबकि बाजार की रिकवरी अब तक पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाई है।

उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ती महंगाई का असर केवल फिल्म निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दर्शकों की मनोरंजन पर खर्च करने की क्षमता भी प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक दबाव बढ़ता है तो सिनेमाघरों, वितरकों, निर्माताओं, तकनीशियनों और पूरे फिल्म उद्योग को इसका बोझ उठाना पड़ेगा। कमल हासन ने स्पष्ट कहा कि फिल्म निर्माण में हर खर्च का उद्देश्य केवल गुणवत्ता होना चाहिए, केवल भव्यता दिखाना नहीं।

अपने पत्र में उन्होंने फिल्म उद्योग में बढ़ती फिजूलखर्ची और दिखावे की संस्कृति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सुधार का मतलब मजदूरों और तकनीशियनों के वेतन, सुरक्षा या सम्मान में कटौती नहीं होना चाहिए। फिल्म सेट पर काम करने वाले लोगों की सुविधाओं, भोजन, यात्रा और रहने की व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

कमल हासन ने अनावश्यक विदेशी शूटिंग और जरूरत से ज्यादा खर्च को उद्योग की बड़ी समस्या बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हर प्रेम कहानी को पेरिस में ही क्यों दिखाना जरूरी समझा जाता है और हर हनीमून स्विट्जरलैंड में ही क्यों खत्म होता है। उन्होंने कहा कि रोमांस दिखाने के लिए विदेशी मुद्रा खर्च करना जरूरी नहीं है और भारतीय सिनेमा को अपने देश की खूबसूरती और सांस्कृतिक विविधता पर भरोसा करना चाहिए।

उन्होंने भारतीय लोकेशनों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि देश के भीतर ही कई ऐसे स्थान मौजूद हैं जहां विश्वस्तरीय फिल्मों की शूटिंग की जा सकती है। उनके अनुसार घरेलू लोकेशनों को प्राथमिकता देने से लागत कम होगी और देश के पर्यटन तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।

कमल हासन ने निर्माता, अभिनेता, निर्देशक, यूनियन, स्टूडियो, वितरक, सिनेमाघर संचालकों और ओटीटी प्लेटफॉर्म से सामूहिक चर्चा की भी अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि फिल्म उद्योग को शूटिंग अनुशासन, सीमित समय में काम पूरा करने, गैरजरूरी लक्जरी खर्च कम करने और ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर गंभीरता से काम करना चाहिए।

अपने पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi की जिम्मेदार उपभोग और अनुशासन संबंधी अपील का भी उल्लेख किया। कमल हासन ने कहा कि यह समय व्यक्तिगत हित से ऊपर राष्ट्रीय हित को रखने का है और भारतीय सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि समाज और संस्कृति को प्रभावित करने वाली बड़ी शक्ति है।

कमल हासन के इस पत्र के बाद फिल्म उद्योग में बहस तेज हो गई है। कई लोग उनके सुझावों को समय की जरूरत बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि बड़े बजट और विदेशी लोकेशन आज के वैश्विक सिनेमा का अहम हिस्सा बन चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ती लागत और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच कमल हासन का यह संदेश आने वाले समय में भारतीय फिल्म उद्योग की कार्यशैली और रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।

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