ब्रेकिंग न्यूज़भोपालमध्य प्रदेश

बरगी क्रूज हादसा: 16 दिन से गौरीघाट-तिलवारा में नावों पर रोक, 50 गांवों का जनजीवन बेहाल; नाविकों पर रोजी-रोटी का संकट

जबलपुर:बरगी क्रूज हादसे के बाद प्रशासन द्वारा नर्मदा नदी में नावों के संचालन पर लगाई गई रोक अब आम लोगों और नाविकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। पिछले 16 दिनों से गौरीघाट और तिलवारा घाट पर नौकायान पूरी तरह ठप है। इसका सीधा असर नर्मदा पार बसे करीब 50 गांवों के हजारों लोगों पर पड़ा है, जिनकी जीवन रेखा ये नावें ही थीं।

ग्रामीणों की परेशानी: 1 किमी का सफर अब 15 किमी का हुआ
नावें बंद होने से मंगेली, सनद पिपरिया, बढ़ैयाखेड़ा, सिवनी टोला जैसे कई गांवों के लोगों का सीधा संपर्क शहर से टूट गया है। पहले ग्रामीण अपनी साइकिल या बाइक बड़ी नावों में रखकर आसानी से नदी पार कर लेते थे। लेकिन अब उन्हें भटौली ब्रिज या तिलवारा मार्ग से 8 से 15 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।

सबसे ज्यादा प्रभावित: रोजाना शहर आने वाले मजदूर, दूध विक्रेता, छात्र और छोटे व्यापारी।

धार्मिक असर: नर्मदा पार स्थित गुरुद्वारे में जाने वाले श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं की आवाजाही भी ठप हो गई है।

नाविकों पर गहराया आर्थिक संकट
गौरीघाट पर करीब 100 नावों का संचालन होता था, जिनमें से 68 को नगर निगम से लाइसेंस प्राप्त है। पिछले 16 दिनों से काम बंद होने के कारण इन परिवारों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। नाविकों का कहना है कि प्रशासन ने ‘लाइफ जैकेट’ अनिवार्य कर दिया है, जिसकी कीमत 700 से 900 रुपये प्रति जैकेट है। अधिकांश नाविक इतने महंगे उपकरण खरीदने में सक्षम नहीं हैं। अब तक केवल 10 नाविक ही पूरी संख्या में लाइफ जैकेट जुटा पाए हैं।

प्रशासन का सख्त रुख: बिना सुरक्षा नहीं चलेंगी नावें
नगर निगम और प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। रामपुर जोन के अधिकारी पवन आसाटी ने बताया कि नाविकों के साथ बैठक कर सुरक्षा मानकों पर चर्चा की गई है। प्रशासन की गाइडलाइन और लाइफ जैकेट की व्यवस्था पूरी होने के बाद ही ठेका प्रक्रिया के जरिए नावों का संचालन दोबारा शुरू किया जाएगा। इसमें करीब एक सप्ताह का समय और लग सकता है।

भेड़ाघाट में लौटी रौनक, पर सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
राहत की बात यह है कि रविवार से भेड़ाघाट के पंचवटी घाट पर नौकायान फिर से शुरू कर दिया गया है, जिससे पर्यटकों और स्थानीय नाविकों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, यहां भी सुरक्षा को लेकर लापरवाही की शिकायतें सामने आ रही हैं। पर्यटकों का आरोप है कि कुछ नाविक फटे और पुराने लाइफ जैकेट पहनाकर सिर्फ औपचारिकता पूरी कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बरगी हादसे के बाद प्रशासन को सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, लेकिन इसके साथ ही ग्रामीणों की परेशानी और नाविकों के रोजगार के लिए कोई त्वरित और व्यावहारिक समाधान भी निकाला जाना चाहिए।

Author

Related Articles

Back to top button