दिल्ली-एनसीआर में 21 से 23 मई तक ट्रकों का ‘चक्का जाम’, 68 से अधिक ट्रांसपोर्ट संगठन करेंगे हड़ताल

नई दिल्ली: वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और दिल्ली सरकार की नई नीतियों के विरोध में राजधानी और एनसीआर के ट्रांसपोर्टर्स ने बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के नेतृत्व में 68 से अधिक परिवहन एसोसिएशनों और यूनियनों ने 21 से 23 मई तक तीन दिवसीय चक्का जाम का ऐलान किया है। ट्रांसपोर्टर्स का आरोप है कि सरकार के फैसलों से परिवहन उद्योग पर भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
क्यों हो रही है यह हड़ताल?
ट्रांसपोर्ट संगठनों की नाराजगी मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दों को लेकर है:
पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) में भारी बढ़ोतरी: दिल्ली आने वाले मालवाहक वाहनों पर बिना भेदभाव के टैक्स बढ़ाया गया है।
BS-4 वाहनों पर प्रतिबंध: 1 नवंबर 2026 से बीएस-4 (BS-4) और उससे नीचे के कमर्शियल वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रस्तावित रोक।
कितना बढ़ा ECC का बोझ?
AIMTC के प्रमुख डॉ. हरीश सभ्रवाल के अनुसार, सरकार ने ECC में 40 से 55 प्रतिशत तक का भारी इजाफा किया है:
हल्के कमर्शियल वाहन: पहले ₹1400, अब बढ़ाकर ₹2000
भारी ट्रक: पहले ₹2600, अब बढ़ाकर ₹4000
ट्रांसपोर्ट संगठनों की प्रमुख आपत्तियां
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन: संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का मूल उद्देश्य केवल उन वाहनों (Transit) को रोकना था जो दिल्ली का इस्तेमाल महज रास्ते के तौर पर करते हैं। लेकिन अब आवश्यक वस्तुएं लाने वाले और लोडिंग के लिए खाली आने वाले ट्रकों पर भी यह टैक्स लगाया जा रहा है, जिन्हें पहले छूट प्राप्त थी।
लाखों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट: BS-4 कमर्शियल वाहनों की एंट्री पर रोक को अवैज्ञानिक बताया गया है। संगठनों का दावा है कि इस फैसले से दिल्ली-एनसीआर के 17 लाख से अधिक ट्रक ऑपरेटरों और उनके परिवारों की आजीविका छिन जाएगी।
फंड का सही उपयोग नहीं: ट्रांसपोर्टर्स ने आंकड़े देते हुए बताया कि दिसंबर 2025 तक ECC के नाम पर 1753.2 करोड़ रुपये वसूले गए, लेकिन इसकी 55 प्रतिशत राशि आज तक खर्च ही नहीं की गई। इसके बावजूद दिल्ली की वायु गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ है।
क्या हैं प्रमुख मांगें?
हड़ताल पर जा रहे संगठनों ने सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं। वे चाहते हैं कि सरकार तुरंत बढ़ी हुई ECC वृद्धि वापस ले, यह शुल्क केवल ट्रांजिट (गुजरने वाले) वाहनों पर ही लागू किया जाए और BS-4 कमर्शियल वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध के फैसले को रद्द किया जाए।













