बंटन भूमि में हेरफेर का मामला गरमाया, अब कानूनी कार्रवाई की तैयारी
वरिष्ठ अधिवक्ता ने कलेक्टर के आदेश की अवहेलना का लगाया आरोप, अवैध प्रविष्टि निरस्त करने और संबंधित पटवारी के निलंबन की उठाई मांग

सिंगरौली। बंटन भूमि को लेकर सामने आए कथित राजस्व हेरफेर के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। मामले में एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित पटवारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कलेक्टर के वैध आदेश की अनदेखी कर सरकारी बंटन भूमि को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज करना न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी संपत्ति के साथ गंभीर खिलवाड़ भी है।

अधिवक्ता ने कहा कि यदि किसी राजस्व अधिकारी ने कलेक्टर के स्पष्ट आदेश के विपरीत अभिलेखों में प्रविष्टि की है, तो यह कानून की दृष्टि में गंभीर अनियमितता है। उन्होंने चेतावनी दी कि मामले को लेकर शीघ्र ही सक्षम उच्च अधिकारियों के समक्ष अपील दायर की जाएगी।
अधिवक्ता ने अपनी शिकायत में दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, पटवारी द्वारा कथित रूप से दर्ज की गई बंटन भूमि की अवैध प्रविष्टि को तत्काल निरस्त किया जाए। दूसरी, कलेक्टर के आदेश की अवमानना करने वाले संबंधित पटवारी को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की जाए, ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पड़ताल हो सके।
उन्होंने कहा कि बंटन भूमि सरकार की आरक्षित अथवा सार्वजनिक उपयोग की संपत्ति होती है। ऐसी भूमि का किसी एक व्यक्ति के नाम दर्ज होना केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सार्वजनिक संसाधनों पर अतिक्रमण जैसा गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
अब पूरे मामले पर जिला प्रशासन की भूमिका पर निगाहें टिकी हुई हैं। लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा, जिससे राजस्व व्यवस्था में आमजन का विश्वास बना रहे।













