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लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई

चितरंगी/सिंगरौली। विमुक्त घुमक्कड़ अर्धघुमक्कड़ जनजाति जिला सिंगरौली द्वारा लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती सामुदायिक भवन चितरंगी में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जिसमें समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के जिला अध्यक्ष जागेश्वर पाल ने की। उन्होंने उपस्थित समाजजनों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर का जीवन सेवा, न्याय, धर्म और जनकल्याण का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि वे अपने बच्चों को शिक्षित बनाएं, संगठित रहें और समाज के विकास एवं उत्थान के लिए निरंतर कार्य करें।

लोकमाता अहिल्याबाई का जीवन प्रेरणा का स्रोत
वक्ताओं ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर भारतीय इतिहास की ऐसी महान शासिका थीं जिन्होंने अपने शासनकाल में प्रजा के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने महिलाओं के सम्मान, शिक्षा, धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों को बढ़ावा दिया तथा न्यायप्रिय और जनहितैषी शासन की मिसाल स्थापित की।

देशभर में कराए मंदिर, घाट और धर्मशालाओं का निर्माण
कार्यक्रम में बताया गया कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर सहित देश के अनेक प्रमुख तीर्थस्थलों के जीर्णोद्धार और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर मंदिरों, घाटों, कुओं, धर्मशालाओं और यात्रियों के लिए विश्राम स्थलों का निर्माण कराया, जिससे समाज के सभी वर्गों को लाभ मिला।

शिक्षा और सामाजिक जागरूकता पर दिया बल
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि अहिल्याबाई होलकर ने समाज में शिक्षा, नैतिकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का कार्य किया। उनका मानना था कि किसी भी समाज की प्रगति शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से ही संभव है। यही कारण है कि आज भी उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है।

समाज को संगठित करने का आह्वान
जिला अध्यक्ष जागेश्वर पाल ने समाज के लोगों से एकजुट होकर समाजहित में कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों को अपनाकर ही समाज को नई दिशा और मजबूती प्रदान की जा सकती है। कार्यक्रम में जिले भर से विमुक्त घुमक्कड़ एवं अर्धघुमक्कड़ जनजाति समाज के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
अंत में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के बताए मार्ग पर चलने तथा समाज के उत्थान के लिए कार्य करने का संकल्प लिया गया।

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