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घनी आबादी में अधिग्रहण बना चिंता का विषय, बीच के मकान तोड़ने से पड़ोसी घरों पर बढ़ा खतरा

मोरवा में मुआवजा वितरण और भवन ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

सिंगरौली। जिले के मोरवा क्षेत्र में एनसीएल द्वारा अधिग्रहित किए जा रहे वार्डों में मुआवजा वितरण और मकानों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई है। हालांकि, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में अपनाई जा रही कार्यप्रणाली को लेकर स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था से आसपास के मकानों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

स्थानीय रहवासियों के अनुसार, मोरवा की अधिकांश बस्तियों में मकान एक-दूसरे से सटे हुए बने हैं। ऐसे में यदि बीच के किसी एक मकान का मुआवजा देकर उसे तोड़ा जाता है, तो उससे लगे दोनों ओर के मकानों में दरारें आने और उनके क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा, ध्वस्तीकरण के दौरान निकलने वाला मलबा नालियों में भर जाने से जल निकासी व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

रहवासियों का कहना है कि वर्तमान प्रक्रिया में पहले मकान खाली कराकर उसे गिराया जाता है और उसके बाद मुआवजा वितरण की औपचारिकताएं पूरी होती हैं। उनका सुझाव है कि एनसीएल को इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए सबसे पहले संबंधित मकानों के दरवाजे-खिड़कियां निकलवानी चाहिए, बिजली एवं पानी के कनेक्शन विधिवत बंद कराने चाहिए और सर्वे पूरा होने के बाद पात्र हितग्राहियों को मुआवजा प्रदान करना चाहिए। इसके बाद ही वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से ध्वस्तीकरण कराया जाए।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से अपनाई जाती है, तो आसपास के मकानों को नुकसान से बचाया जा सकेगा, नालियां अवरुद्ध नहीं होंगी और विस्थापन की प्रक्रिया भी अधिक सुरक्षित एवं सुचारु रूप से पूरी हो सकेगी। लोगों ने एनसीएल प्रबंधन से इस विषय पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।

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