RSS दुनिया का सबसे बड़ा लेकिन सबसे ज्यादा गलत समझा जाने वाला संगठन: मोहन भागवत

नागपुर, 14 जून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संगठन को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। शनिवार को संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आरएसएस दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है, लेकिन साथ ही यह सबसे अधिक गलत समझा जाने वाला संगठन भी है। उन्होंने कहा कि संघ को बाहर से देखकर समझना आसान नहीं है, इसके वास्तविक स्वरूप को जानने के लिए इसके विचारों को भीतर से अनुभव करना जरूरी है।
बाहरी गतिविधियों से बनीं भ्रांतियां
मोहन भागवत ने कहा कि आम लोगों के बीच आरएसएस को लेकर कई तरह के भ्रम हैं। कुछ लोग स्वयंसेवकों के गणवेश और पथ संचलन को देखकर इसे ‘अर्धसैनिक संगठन’ समझ लेते हैं, तो कुछ लोग पारंपरिक खेलों के कारण इसे केवल एक ‘व्यायामशाला’ मानते हैं। जबकि संघ की वास्तविक पहचान राष्ट्र निर्माण और समाज संगठन से जुड़ी है।
किसी के विरोध में नहीं, राष्ट्रहित में स्थापना
संघ प्रमुख ने स्पष्ट किया कि आरएसएस किसी विशेष परिस्थिति की प्रतिक्रिया या किसी के विरोध में अस्तित्व में नहीं आया था। इसकी स्थापना किसी वर्ग, समुदाय या राजनीतिक दल के विरोध के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रहित में समाज को संगठित करने के लिए की गई थी। संघ का कार्य किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक परिवर्तन के लिए है।
उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चला रहा है, ताकि संवाद के जरिए लोगों के मन में मौजूद गलतफहमियों को दूर किया जा सके।













