गुरु पूर्णिमा पर सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सिंगरौली में गुरुजनों का भव्य सम्मान
पूर्व छात्र एवं प्राधिकरण अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल बोले- जीवन की हर उपलब्धि के पीछे गुरुजनों का अमूल्य योगदान

सिंगरौली-भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान देने वाली गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम उदाहरण बुधवार को सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सिंगरौली में देखने को मिला। गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) के पावन अवसर पर सरस्वती शिक्षा समिति सिंगरौली के तत्वावधान में आयोजित गुरु सम्मान समारोह श्रद्धा, संस्कार और गरिमामय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। विद्यालय के भैया-बहनों ने अपने गुरुजनों का तिलक-वंदन कर उपहार भेंट किए और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
समारोह के मुख्य अतिथि विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण सिंगरौली के अध्यक्ष एवं विद्यालय के पूर्व छात्र वीरेंद्र गोयल रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता सरस्वती शिक्षा समिति सिंगरौली के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में सरस्वती शिक्षा परिषद महाकौशल प्रांत की प्रबंधकारिणी समिति के सदस्य यदुवीर यादव तथा भाजपा सिंगरौली मंडल के पूर्व अध्यक्ष भूपेंद्र गर्ग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विद्यालय के सह-व्यवस्थापक प्रदीप जैन, प्रबंधकारिणी समिति के सदस्य मोतीचंद, अशोक जैन एवं राजीव सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, विद्यार्थी और अभिभावक मौजूद रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। इसके बाद छात्राओं ने गुरु वंदना की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर पूरे सभागार को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। विद्यालय के प्राचार्य ओमप्रकाश पाण्डेय ने अतिथियों का परिचय कराते हुए भारतीय परंपरा के अनुरूप उनका स्वागत किया।
इसके उपरांत विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति एवं विद्यार्थियों ने सभी गुरुजनों का तिलक, पुष्प एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया। यह भावपूर्ण क्षण उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणादायी बन गया।

मुख्य अतिथि वीरेंद्र गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि “आज मैं जिस स्थान पर हूं, वह मेरे गुरुजनों के मार्गदर्शन और संस्कारों का ही परिणाम है। सरस्वती शिशु मंदिर का छात्र होना मेरे लिए गर्व की बात है।” उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के बताए मार्ग पर चलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
विशिष्ट अतिथि यदुवीर यादव ने कहा कि गुरु की महिमा शब्दों में व्यक्त नहीं की जा सकती। गुरु ही मनुष्य के जीवन को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरु की आज्ञा और संस्कारों को जीवन का आधार बनाने का संदेश दिया।
समारोह के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश महतो ने सभी अतिथियों, गुरुजनों एवं अभिभावकों का आभार व्यक्त किया। विश्व कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसके पश्चात प्रबंधकारिणी समिति द्वारा सभी अतिथियों एवं गुरुजनों के लिए स्नेहभोज का आयोजन किया गया।
गुरु पूर्णिमा के इस गरिमामय आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि बदलते दौर में भी भारतीय संस्कृति की गुरु-शिष्य परंपरा आज उतनी ही प्रासंगिक और प्रेरणादायी है, जितनी सदियों पहले थी।













