मध्यस्थता को न्याय व्यवस्था के केंद्र में लाने की जरूरत: मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत

जयपुर। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA), कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन (CLA), सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और निवारण-मेडिएटर्स ऑफ सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में जयपुर में आयोजित ‘कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस-2026’ के दूसरे दिन न्याय प्रणाली में मध्यस्थता (मेडिएशन) की भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई। सम्मेलन में भारत सहित कई कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीशों और विधि विशेषज्ञों ने भाग लिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि मध्यस्थता अब केवल वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली नहीं रही, बल्कि इसे न्याय व्यवस्था के केंद्र में स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मुकदमेबाजी जहां विवाद का फैसला करती है, वहीं मध्यस्थता विवाद के मूल कारणों को समझकर सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान खोजती है। इससे न्याय अधिक सुलभ, त्वरित और कम खर्चीला बनता है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई ने मध्यस्थता को विवाद समाधान का पहला विकल्प बनाने पर जोर दिया। वहीं राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने बताया कि राज्य में मध्यस्थता को संस्थागत रूप से मजबूत करने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में पारिवारिक, आपराधिक, व्यावसायिक, सीमा-पार और कार्यस्थल संबंधी विवादों के समाधान में मध्यस्थता की बढ़ती उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि संवाद, विश्वास और सहमति आधारित समाधान ही भविष्य की प्रभावी न्याय व्यवस्था की आधारशिला बन सकते हैं।













