देश विदेशबड़ी खबरब्रेकिंग न्यूज़

रेल कर्मचारियों को बड़ी राहत: 21 वर्ष से अधिक आयु के अविवाहित पुत्र को भी मिलेगी मुफ्त चिकित्सा सुविधा

रेलवे बोर्ड ने बदले नियम, उम्मीद पोर्टल पर जानकारी अपडेट करना होगा अनिवार्य

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने अपने चिकित्सा सुविधा नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए रेल कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत दी है। रेलवे बोर्ड के नए आदेश के अनुसार अब 21 वर्ष से अधिक आयु के अविवाहित पुत्र भी रेलवे की मुफ्त चिकित्सा सुविधा का लाभ ले सकेंगे। इसके लिए निर्धारित पात्रता शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा।

तीन शर्तें पूरी होने पर मिलेगा लाभ

रेलवे बोर्ड के अनुसार 21 वर्ष से अधिक आयु का अविवाहित पुत्र तभी रेलवे चिकित्सा सुविधा का पात्र होगा, जब वह अविवाहित हो, पूरी तरह रेलवे कर्मचारी या पेंशनर पर आर्थिक रूप से निर्भर हो तथा कर्मचारी या पेंशनर के साथ उसी पते पर निवास करता हो। इन तीनों शर्तों को पूरा करने वाले आश्रितों को उम्मीद (UMID) कार्ड के माध्यम से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

उम्मीद पोर्टल पर अपडेट करना होगा रिकॉर्ड

रेलवे ने कर्मचारियों और पेंशनरों को निर्देश दिए हैं कि वे उम्मीद पोर्टल पर लॉगिन कर अपने आश्रित की जानकारी अपडेट करें तथा आवश्यक घोषणा-पत्र और दस्तावेज संबंधित कार्मिक विभाग में जमा कराएं। यदि भविष्य में आश्रित की वैवाहिक स्थिति, आर्थिक निर्भरता या निवास में कोई परिवर्तन होता है तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को देना अनिवार्य होगा।

रेलवे ने स्पष्ट किया है कि गलत जानकारी देने या तथ्य छिपाने की स्थिति में चिकित्सा सुविधा वापस ली जा सकती है और संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी।

अस्पतालों को भी जारी हुए निर्देश

रेलवे बोर्ड ने सभी रेलवे अस्पतालों और चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 21 वर्ष से अधिक आयु के अविवाहित पुत्र का उपचार करते समय पात्रता की शर्तों का विशेष रूप से सत्यापन करें। यदि किसी मामले में पात्रता को लेकर संदेह हो तो उसे कार्मिक विभाग के पास जांच के लिए भेजा जाए।

रेलवे का कहना है कि इस नई व्यवस्था का उद्देश्य पात्र परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना, चिकित्सा सेवाओं में पारदर्शिता बनाए रखना तथा संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना है। यह फैसला रेलवे कर्मचारियों और पेंशनरों के परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।

Author

Related Articles

Back to top button