वंदे मातरम् पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, नितिन नवीन बोले- राष्ट्रीय चेतना का अमर प्रतीक

नई दिल्ली। वंदे मातरम् के सम्मान और इसकी ऐतिहासिक विरासत को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता, राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा अमर प्रतीक है। उन्होंने कांग्रेस कार्यसमिति द्वारा वर्ष 1937 के फैसले को दोबारा स्वीकार किए जाने और कांग्रेस कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के केवल पहले दो पद गाए जाने के निर्णय का विरोध किया।
नवीन ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् ने स्वदेशी आंदोलन के दौरान अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनभावनाओं को आवाज दी थी। ब्रिटिश सरकार ने इसके प्रभाव को देखते हुए कई स्थानों पर इसके सार्वजनिक गायन को रोकने का प्रयास किया, लेकिन यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना का हिस्सा बन गया।
उन्होंने 1923 के काकीनाडा कांग्रेस अधिवेशन और 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति के निर्णय का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि बाद में धार्मिक आपत्तियों के चलते वंदे मातरम् के सार्वजनिक गायन को सीमित कर दिया गया। नवीन ने कहा कि राष्ट्रीय गीत के इतिहास को केवल धार्मिक संदर्भों के आधार पर देखना स्वतंत्रता संग्राम की व्यापक विरासत के साथ न्याय नहीं है।
भाजपा अध्यक्ष ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधीजी ने भी वंदे मातरम् को स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान साम्राज्यवाद विरोधी हुंकार और राष्ट्रीय भावना की अभिव्यक्ति माना था। उन्होंने कहा कि करोड़ों भारतीयों के लिए यह गीत आजादी के संघर्ष, बलिदान और राष्ट्रगौरव से जुड़ा रहा है।
नवीन ने कहा कि 24 जनवरी 1950 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जन गण मन को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किए जाने के साथ वंदे मातरम् को भी समान सम्मान दिए जाने की बात कही थी। उनके अनुसार, जन गण मन राष्ट्रगान और वंदे मातरम् राष्ट्रीय गीत के रूप में देश की राष्ट्रीय चेतना में प्रतिष्ठित हैं।
भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि वंदे मातरम् किसी दल की राजनीतिक संपत्ति नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों की ऐतिहासिक विरासत है। उन्होंने कहा कि 1947 में आजादी का जयघोष वंदे मातरम् था और 2047 के विकसित भारत का महाघोष भी वंदे मातरम् होगा।













