फिर नर घडिय़ाल विहीन हुआ सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य,हाल ही में हुई है नर घडियाल की मौत…

फिर नर घडिय़ाल विहीन हुआ सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य,हाल ही में हुई है नर घडियाल की मौत…
सीधी राजू गुप्ता
सीधी जिले का सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य एक बार फिर नर घडिय़ाल विहीन हो गया है। हाल ही में सीधी जिले का एकमात्र नर घडिय़ाल तेज बहाव के चलते बहकर उत्तर प्रदेश की सीमा में चला गया था। रेस्क्यू टीम द्वारा उसे वापस लाने की कोशिश की जा रही थी लेकिन इस दौरान उसकी मौत हो गई।
अभी तक घडिय़ाल की मौत के ठोस कारणों का पता नहीं चल पाया है।
लगभग 210 किलोमीटर में फैला सोन घडिय़ाल क्षेत्र वर्ष 1981 में स्थापित किया गया था, जिसमें सोन और गोपद नदियों के हिस्सों को शामिल किया गया है। इस क्षेत्र में वर्ष 2024 में चंबल अभ्यारण्य से एक नर घडिय़ाल लाकर छोड़ा गया था, जिससे 5 मादा घडिय़ालों से कुल 132 बच्चों का जन्म हुआ था। लेकिन इस वर्ष भारी बारिश और तेज बहाव के चलते नवजात बच्चे भी बह गए और साथ ही एकमात्र नर घडिय़ाल भी बहकर यूपी सीमा में पहुंच गया।
पानी का बहाव कम होने के बाद सोन घडिय़ाल की टीम रेस्क्यू में जुटी, लेकिन दुर्भाग्यवश इस दौरान नर घडिय़ाल की मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे घडिय़ाल संरक्षण क्षेत्र में नर घडिय़ाल नहीं बचा है, जिससे अब प्रजनन प्रक्रिया पूरी तरह से रुक जाएगी। यह स्थिति सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य की स्थापना वर्ष 1981 में हुई थी और यह भारत के उन चुनिंदा संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है जहां घडिय़ालों का प्रजनन कराया जाता है। यह घटना न सिर्फ जैव विविधता के लिए चिंता का विषय है, बल्कि संरक्षण की दिशा में आने वाली चुनौतियों को भी उजागर करती है।
इनका कहना है
स्थिति को गंभीरता से लिया गया है और एक बार फिर से नर घडिय़ाल लाने के प्रयास शुरू किए जाएंगे, ताकि आने वाले समय में सोन घडिय़ाल अभ्यारण्य में प्रजनन प्रक्रिया को पुन: शुरू किया जा सके।
राजेश कन्ना टी
डिप्टी डायरेक्टर
संजय टाइगर रिजर्व, सीधी













