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15 साल के वैभव सूर्यवंशी की कप्तानी में कमाल, महज तीन सेकंड में लिया रिव्यू का फैसला और पलट गया मैच

नई दिल्‍ली- उम्र सिर्फ 15 साल, सामने दलीप ट्रॉफी का सेमीफाइनल और अचानक कंधों पर आ गई टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी। ऐसे हालात में किसी भी युवा खिलाड़ी पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन वैभव सूर्यवंशी ने रविवार को अपने एक फैसले से साबित कर दिया कि मैदान पर नेतृत्व करने का आत्मविश्वास उम्र का मोहताज नहीं होता। बेंगलुरु में ईस्ट जोन और सेंट्रल जोन के बीच खेले जा रहे मुकाबले में नियमित कप्तान ईशान किशन के चोटिल होकर मैदान से बाहर जाने के बाद वैभव ने कमान संभाली और कुछ ही देर में ऐसा निर्णय लिया, जो अब चर्चा का विषय बन गया है।

40वें ओवर में आया मैच का सबसे रोमांचक पल

मुकाबले का सबसे दिलचस्प क्षण 40वें ओवर में सामने आया। सेंट्रल जोन के बल्लेबाज आर्यन जुयाल उस समय 46 रन बनाकर अच्छी लय में थे। तेज गेंदबाज मुकेश कुमार की गेंद पर ईस्ट जोन के खिलाड़ियों ने कैच के पीछे की जोरदार अपील की, लेकिन मैदानी अंपायर ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद मुकेश कुमार ने वैभव की तरफ देखकर इशारा किया कि गेंद बल्ले का किनारा लेकर गई हो सकती है, हालांकि वैभव खुद पूरी तरह आश्वस्त नहीं थे।

सिर्फ तीन सेकंड बचे थे, फिर भी लिया बड़ा फैसला

यही वह पल था जब युवा कप्तान की असली परीक्षा हुई। समीक्षा लेने के लिए बहुत कम वक्त बचा था — बताया गया कि रिव्यू के लिए महज करीब तीन सेकंड शेष थे। अपने संदेह के बावजूद वैभव ने समीक्षा का साहसिक फैसला लिया। तकनीकी जांच में अल्ट्राएज पर हल्का उभार दिखा, मैदानी फैसला पलटा और आर्यन जुयाल को आउट करार दिया गया। फैसला सही साबित होते ही वैभव की खुशी देखते ही बनी और उन्होंने साथी खिलाड़ियों के साथ इस पल का जश्न मनाया।

उपकप्तान से अचानक बने कार्यवाहक कप्तान

इस एक फैसले ने वैभव की भूमिका को अचानक बदल दिया। कुछ देर पहले तक वह उपकप्तान की भूमिका में मैदान पर थे, लेकिन ईशान किशन को दाहिने हाथ की उंगली में चोट लगने के बाद उन्हें वरिष्ठ और अनुभवी साथियों के बीच नेतृत्व संभालना पड़ा। वैभव ने लगभग 20 ओवर तक टीम की कमान बखूबी संभाली। दलीप ट्रॉफी जैसे बड़े घरेलू मंच पर, जहां अंतरराष्ट्रीय अनुभव रखने वाले खिलाड़ी मौजूद हैं, वहां अचानक कप्तानी मिलना और सही फैसला लेना उनकी क्रिकेटिंग समझ को दर्शाता है।

बल्ले के साथ गेंद से भी दिखा चुके हैं कमाल

वैभव का यह टूर्नामेंट सिर्फ कप्तानी तक सीमित नहीं रहा। क्वार्टर फाइनल में नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ बल्ले से भले ही वह सिर्फ आठ रन बना सके, लेकिन गेंदबाजी में एक ही ओवर में दो विकेट लेकर टीम को अहम सफलता दिलाई थी। उस मैच में ईस्ट जोन ने एक पारी और 210 रन के विशाल अंतर से जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया था।

सेंट्रल जोन ने दी थी कड़ी चुनौती

सेमीफाइनल में भी वैभव के सामने आसान राह नहीं थी। पहले बल्लेबाजी करते हुए सेंट्रल जोन ने 200 रन का आंकड़ा पार कर लिया था, रिंकू सिंह ने अर्धशतक जड़कर पारी को संभाला और सरांश जैन के साथ अहम साझेदारी भी निभाई। सेंट्रल जोन के बल्लेबाजों ने ईस्ट जोन के गेंदबाजों के सामने धैर्य का परिचय दिया, लेकिन जुयाल का विकेट गिरते ही ईस्ट जोन को बड़ी राहत मिली।

आईपीएल से लेकर टी20 तक चमक बिखेर चुके हैं वैभव

पिछले कुछ महीनों में वैभव का नाम तेजी से उभरते भारतीय क्रिकेटरों में शुमार हो रहा है। आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के लिए उनके प्रदर्शन ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई, वहीं जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में दो अर्धशतक जड़कर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी क्षमता का लोहा मनवाया। हालांकि इंग्लैंड के खिलाफ टी20 डेब्यू में शुरुआती मैचों में वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए थे, लेकिन जिम्बाब्वे दौरे में शानदार वापसी की। इसके बाद दलीप ट्रॉफी में उपकप्तानी मिलना उनके करियर के अगले पड़ाव के तौर पर देखा गया, और अब कप्तानी में मिला यह मौका उनकी भूमिका को और विस्तार दे सकता है।

दबाव में लिया गया फैसला बना सुर्खियां

एक सफल रिव्यू किसी खिलाड़ी की कप्तानी क्षमता का अंतिम प्रमाण भले ही न हो, लेकिन दबाव के क्षण में लिया गया फैसला जरूर मायने रखता है। संदेह के बावजूद वैभव ने जोखिम उठाया और तकनीक ने उनके फैसले को सही ठहरा दिया। मैदान पर उम्र भले ही 15 साल की हो, लेकिन उन चंद सेकंड के फैसले ने दिखा दिया कि बड़ी जिम्मेदारी मिलने पर वैभव सूर्यवंशी पीछे हटने वालों में से नहीं हैं। ईशान किशन की चोट से अचानक मिली कप्तानी, तीन सेकंड शेष रहते लिया गया रिव्यू का फैसला और उसके सही साबित होने की खुशी — दलीप ट्रॉफी का यह पल उनके क्रिकेट सफर में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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