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‘खतरों के खिलाड़ी 15’ से बाहर होने के बाद अविका गौर का इमोशनल पोस्ट, बोलीं- बाहर बैठकर हर कोई हीरो बन जाता है

मुम्‍बई- टेलीविजन अभिनेत्री अविका गौर का ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ का सफर भले ही उम्मीद से पहले खत्म हो गया हो, लेकिन शो से बाहर आने के बाद उन्होंने इसे सिर्फ हार-जीत के नजरिए से नहीं बल्कि जिंदगी की एक बड़ी सीख के तौर पर लिया है। एलिमिनेशन के बाद घर बैठकर शो के नए एपिसोड देख रहीं अविका को महसूस हुआ कि स्क्रीन के सामने बैठकर किसी स्टंट को आसान समझना और उसी चुनौती के बीच खड़े होकर उसे पूरा करना, दोनों बिल्कुल अलग अनुभव हैं। उन्होंने कहा कि किसी परिस्थिति से बाहर खड़े होकर फैसला करना आसान होता है, क्योंकि वहां डर, दबाव, समय की पाबंदी और उस पल का असली जोखिम मौजूद नहीं होता।

‘शायद बेहतर कर सकती थी’ के विचार से जूझती रहीं अविका

सोशल मीडिया पर लिखे अपने लंबे पोस्ट में अविका ने स्वीकार किया कि एपिसोड देखते वक्त उनके मन में बार-बार यह ख्याल आता है कि अगर वह उस वक्त वहां होतीं तो शायद बेहतर प्रदर्शन कर पातीं। लेकिन अगले ही पल उन्हें एहसास होता है कि अब वह घर के आराम में बैठकर वह चुनौती देख रही हैं, जबकि असल स्टंट के सामने खड़े प्रतिभागी के पास यह सुविधा नहीं होती। उनके अनुसार, बाहर बैठकर किसी स्थिति का ‘एक्सपर्ट’ बन जाना बेहद आसान है, जबकि असल परिस्थिति में डर और अनिश्चितता के बीच फैसला लेना उतना सरल नहीं होता।

पहली बार 21 साल की उम्र में लिया था हिस्सा

अविका इस शो से पहले भी जुड़ चुकी हैं — वह ‘खतरों के खिलाड़ी’ के नौवें सीजन में 21 साल की उम्र में हिस्सा ले चुकी हैं। उनके मुताबिक, उस समय शो ने उन्हें खुद को समझने में मदद की थी। सालों बाद दोबारा इस मंच पर लौटना उनके लिए भावनात्मक रूप से भी अहम रहा, क्योंकि इससे वह अपने पुराने दौर से दोबारा जुड़ना चाहती थीं।

ओरी के खिलाफ स्टंट में हुईं बाहर

एलिमिनेशन राउंड में अविका को ओरी के खिलाफ स्टंट करना पड़ा था। ओरी ने यह चुनौती करीब 10 मिनट में पूरी कर ली, जबकि अविका को इसमें 13 मिनट से ज्यादा वक्त लगा और इसी आधार पर उनका सफर खत्म हो गया। इस सीजन में रूबीना दिलैक, रित्विक धनजानी, फरहान भट्ट और करण वाही जैसे चर्चित चेहरे भी हिस्सा ले रहे हैं, वहीं शो की मेजबानी फिल्मकार रोहित शेट्टी कर रहे हैं।

हर नतीजा अपने हाथ में नहीं होता — अविका

अविका ने माना कि मेहनत और इच्छाशक्ति के बावजूद कई बार नतीजा अपने मुताबिक नहीं होता, और बीती बात को बार-बार मन में दोहराने से वह बदली नहीं जा सकती। उन्होंने इस अनुभव के लिए उन सभी लोगों और मौकों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उन्हें यहां तक पहुंचाया। उनका मानना है कि इस अनुभव से बना खालीपन हमेशा नहीं रहेगा और समय के साथ यह दर्द की बजाय एक कृतज्ञता भरी याद में बदल जाएगा।

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