सोन नदी उफान पर, पुलिया के ऊपर बह रहा पानी; जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे शिक्षक और बच्चे
कुढ़ेरी नाला से आगे तक जलभराव, खैरपुर स्कूल जाने का यही एकमात्र रास्ता; अतरैला में सोन-गोपद नदी का पाट पार कर पहुंच रहे शिक्षक

चितरंगी। लगातार हो रही बारिश से चितरंगी क्षेत्र में सोन नदी समेत नदी-नाले उफान पर हैं। कुढ़ेरी नाला से आगे तक मार्ग पर भारी जलभराव है। पुलिया के ऊपर से पानी बह रहा है, इसके बावजूद शिक्षक, अतिथि शिक्षक और स्कूली बच्चे इसी रास्ते से आवागमन करने को मजबूर हैं। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय खैरपुर, संकुल केंद्र वर्दी पहुंचने के लिए यही एकमात्र रास्ता बताया जा रहा है। बुधवार को प्रधानाध्यापक भोला श्रीवास्तव, अतिथि शिक्षक और विद्यालय के बच्चे पुलिया के ऊपर से बहते पानी के बीच स्कूल जाते दिखाई दिए। पानी का बहाव इतना अधिक था कि पुलिया का अधिकांश हिस्सा पानी में डूब गया था।
पुलिया का पता बताने लकड़ी के टुकड़े लगाए
जलभराव के कारण पुलिया के दोनों ओर लकड़ी के टुकड़े लगाए गए हैं, ताकि लोगों को पानी के नीचे पुलिया की स्थिति का अंदाजा हो सके। मौके की स्थिति देखकर साफ है कि पानी का बहाव तेज होने पर जरा-सी चूक किसी व्यक्ति को बहाव में ले जा सकती है। खासकर छोटे बच्चों के लिए यह रास्ता बेहद खतरनाक बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुलिया के ऊपर से पानी बह रहा है, तब तक इस मार्ग पर आवागमन रोक दिया जाना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि किसी अनहोनी से बचा जा सके।
अतरैला में सोन-गोपद का पाट पार कर स्कूल पहुंच रहे शिक्षक
इसी तरह चितरंगी विकासखंड के खैरपुर गांव के अतरैला क्षेत्र में भी बारिश के कारण हालात चिंताजनक हैं। यहां सोन और गोपद नदी का पाट करीब दो किलोमीटर तक फैला हुआ बताया जा रहा है। बारिश के दौरान दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के बावजूद शिक्षक और अतिथि शिक्षक नदी पार कर विद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक नदी का पानी गहरा होने के साथ बहाव भी तेज है। ऐसे में नदी पार करना अपने आप में जोखिम भरा है। क्षेत्र में मगरमच्छों का खतरा भी बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार मगरमच्छ गांव के भीतर तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में बाढ़ के बीच नदी पार कर स्कूल पहुंचना शिक्षकों और छात्रों के लिए दोहरी मुसीबत बन गया है।
सवाल: बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी
बारिश के दौरान नदी और पुलिया के ऊपर से पानी बहने के बावजूद स्कूली बच्चों और शिक्षकों का आवागमन जारी रहना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जलस्तर सामान्य होने तक ऐसे खतरनाक रास्तों पर आवागमन रोकने के साथ स्कूल पहुंचने के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।











