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कलेक्टर की पहल से सिंगरौली में मशरूम उत्पादन को मिलेगा नया विस्तार

छोटे स्तर पर हो रहे उत्पादन को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर विकसित होगा क्लस्टर आधारित व्यावसायिक मॉडल, सीएसआर से बड़ी उत्पादन इकाई की तैयारी

सिंगरौली, । जिले में ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार से जोड़ने और स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ाने की दिशा में कलेक्टर श्री गौरव बैनल की पहल अब व्यावसायिक मशरूम उत्पादन के संगठित मॉडल का रूप लेने जा रही है। कलेक्टर द्वारा जिले में छोटे स्तर पर संचालित मशरूम उत्पादन इकाई का अवलोकन कर इसकी संभावनाओं को समझने के बाद स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को इस गतिविधि से जोड़ने का सुझाव दिया गया था। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए अब स्व-सहायता समूह की महिलाओं को तकनीकी विशेषज्ञ के साथ जोड़कर बड़े स्तर पर मशरूम उत्पादन की दिशा में कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

इसी संबंध में कलेक्ट्रेट सभागार में कलेक्टर श्री गौरव बैनल की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्व-सहायता समूह की महिलाओं, मशरूम उत्पादन से जुड़े तकनीकी व्यक्ति तथा जिला पंचायत एवं ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में छोटे स्तर पर संचालित मशरूम उत्पादन को संगठित रूप देकर महिलाओं के लिए नियमित एवं टिकाऊ आय का माध्यम बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

कलेक्टर श्री बैनल ने कहा कि जिले में बटन मशरूम उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं हैं और इसे स्व-सहायता समूहों से जोड़कर रोजगार एवं आय का प्रभावी मॉडल विकसित किया जा सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि सीएसआर मद के माध्यम से आवश्यक सहयोग प्राप्त कर एक बड़े क्लस्टर आधारित मशरूम उत्पादन मॉडल की दिशा में कार्य किया जाए। प्रस्तावित मॉडल में प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के साथ-साथ स्पॉन एवं कम्पोस्ट की व्यवस्था, बड़े पैमाने पर उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और विपणन की समेकित व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि मशरूम उत्पादन की खासियत यह है कि कम भूमि और कम समय में इसे संचालित कर बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। इसलिए ग्रामीण महिलाओं के लिए यह गतिविधि स्वरोजगार का प्रभावी माध्यम बन सकती है। उन्होंने स्व-सहायता समूह की महिलाओं को व्यावसायिक स्तर पर मशरूम उत्पादन के लिए आवश्यक प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

 

बैठक में तय किया गया कि महिलाओं को उत्पादन कक्ष की तैयारी, तापमान एवं आर्द्रता नियंत्रण, स्वच्छता, स्पॉन एवं कम्पोस्ट प्रबंधन, उत्पादन तकनीक, फसल की देखभाल, कटाई, पैकेजिंग एवं भंडारण सहित पूरी उत्पादन प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाएगा। महिलाओं को बटन मशरूम उत्पादन इकाइयों का भ्रमण भी कराया जाएगा, ताकि वे वास्तविक उत्पादन प्रक्रिया को समझकर अपने स्तर पर इकाई संचालित करने के लिए तैयार हो सकें। रोग एवं कीट प्रबंधन तथा उत्पादन लागत को कम करने की वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि स्व-सहायता समूहों को केवल उत्पादन तक सीमित न रखते हुए मशरूम की पूरी वैल्यू चेन से जोड़ा जाए। आवश्यकता के अनुसार समूहों को स्पॉन उत्पादन, कम्पोस्ट तैयार करने, उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन जैसी गतिविधियों में विकसित किया जाए। उत्पाद की बिक्री के लिए स्थानीय बाजार, होटल, रेस्टोरेंट, सब्जी विक्रेताओं, संस्थानों तथा सीधे उपभोक्ताओं से प्रभावी मार्केट लिंकेज तैयार किया जाए। आगे चलकर जिले के बाहर के बाजारों में भी उत्पाद की आपूर्ति की संभावनाओं का परीक्षण किया जाए।

उन्होंने कहा कि समूह की महिलाएं उत्पादन के साथ पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन एवं लेखा-जोखा जैसी गतिविधियों में भी भूमिका निभाएं। इससे स्व-सहायता समूह एक सामान्य आजीविका गतिविधि से आगे बढ़कर एक संगठित महिला उद्यम के रूप में विकसित हो सकेगा।

कलेक्टर श्री बैनल ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य मशरूम उत्पादन को केवल अतिरिक्त आय की गतिविधि के रूप में संचालित करना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए नियमित, टिकाऊ और स्थानीय स्तर पर रोजगार देने वाला व्यवसाय विकसित करना है। उन्होंने कहा कि यदि उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी व्यवस्था एक साथ विकसित की जाती है तो इससे महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्पॉन, कम्पोस्ट, उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन से जुड़े स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

उल्लेखनीय है कि कलेक्टर श्री बैनल द्वारा जिले में छोटे स्तर पर संचालित मशरूम उत्पादन इकाई का भ्रमण कर स्वयं इसकी उत्पादन प्रक्रिया एवं संभावनाओं का अवलोकन किया गया था। मौके पर सीमित संसाधनों और छोटे स्थान में हो रहे उत्पादन को देखते हुए उन्होंने इसे स्व-सहायता समूहों से जोड़कर बड़े स्तर पर विकसित करने का सुझाव दिया था। इसी सुझाव के आधार पर तकनीकी व्यक्ति, स्व-सहायता समूह एवं ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। अब सीएसआर के सहयोग से बड़े लैब, कम्पोस्टिंग यूनिट एवं उत्पादन इकाई विकसित कर इसे क्लस्टर आधारित व्यावसायिक मॉडल के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री संघप्रिय, डीपीएम श्री मंगलेश्वर सिंह, ग्रामीण आजीविका मिशन के अधिकारी, मशरूम उत्पादन से जुड़े तकनीकी व्यक्ति एवं स्व-सहायता समूहों की महिलाएं उपस्थित रहीं। महिलाओं द्वारा प्रस्तावित गतिविधि को लेकर अपने विचार एवं सुझाव भी प्रस्तुत किए गए।

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