सुप्रीम कोर्ट में बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश की दलील: ‘मेरी नियुक्ति पूरी तरह संवैधानिक, नई सरकार में दोबारा बना मंत्री’

नई दिल्ली/पटना। बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने अपनी नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका के जवाब में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया है। उन्होंने अपनी नियुक्ति को संविधान के अनुच्छेद 164 के प्रावधानों के अनुरूप और पूरी तरह संवैधानिक बताया है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट से इस याचिका को खारिज करने की मांग की है।
हलफनामे की मुख्य बातें और दलीलें:
कार्यकाल और नई सरकार: दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया कि उन्हें पहली बार 22 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री बनाया गया था। 15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री के इस्तीफे से मंत्रिपरिषद भंग हो गई, जिससे उनका 6 महीने का कार्यकाल पूरा नहीं हो सका। करीब 22 दिन के गैप के बाद, नई सरकार बनने पर 7 मई 2026 को नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सलाह पर उन्हें दोबारा मंत्री नियुक्त किया गया।
एसआर चौधरी केस से अलग है मामला: उन्होंने ‘एसआर चौधरी बनाम पंजाब राज्य’ फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वह नियम एक ही सरकार (समान मंत्रिपरिषद) में छह महीने की सीमा से बचने के लिए की गई दोबारा नियुक्ति पर लागू होता है। जबकि, उनके मामले में पुरानी मंत्रिपरिषद पूरी तरह समाप्त हो चुकी थी और नई सरकार का गठन हुआ था।
अब बन चुके हैं MLC: मंत्री ने कोर्ट को अवगत कराया कि अब वे गैर-विधायक नहीं हैं। 5 अगस्त 2026 को राज्यपाल ने उन्हें बिहार विधान परिषद (MLC) का सदस्य मनोनीत किया है और 6 अगस्त को उन्होंने शपथ भी ले ली है।
उन्होंने तर्क दिया कि उनकी वर्तमान संवैधानिक स्थिति (विधानमंडल का सदस्य होने) को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि कोर्ट को लगता है कि यह मामला एसआर चौधरी फैसले के दायरे में आता है, तो अनुच्छेद 164(4) की व्याख्या के लिए इसे बड़ी बेंच (संविधान पीठ) के पास भेजा जाना चाहिए।













