CJP प्रदर्शन विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने दिए 4 प्रमुख बिंदुओं पर जांच के सख्त निर्देश, गवाहों की पहचान रहेगी पूरी तरह गुप्त
5 सदस्यीय हाई पावर कमेटी करेगी पैलेट गन और हिंसा के आरोपों की पड़ताल, 9 अक्टूबर को अगली सुनवाई

नई दिल्ली।कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों के दौरान हुए विवाद की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 5 सदस्यीय ‘हाई पावर इंक्वायरी कमेटी’ (HPEC) ने रूपरेखा तय कर ली है। अदालत ने कमेटी को शुरुआती चरण में प्राथमिक रूप से 4 अहम बिंदुओं पर फोकस करते हुए गहन जांच करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, न्यायालय ने गवाहों की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने के आदेश दिए हैं।
जांच के दायरे में शामिल 4 प्रमुख बिंदु:
पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच: प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पैलेट गन के कथित इस्तेमाल के आरोपों की सत्यता जांची जाएगी।
महिला प्रदर्शनकारियों से उत्पीड़न: महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हिंसा, अभद्रता और उत्पीड़न के आरोपों की पड़ताल होगी।
पुलिसकर्मियों को लगी चोटें: ड्यूटी पर तैनात घायल पुलिसकर्मियों और उन पर हुए हमलों के साक्ष्यों की जांच की जाएगी।
संपत्ति का नुकसान व दोनों पक्षों की हिंसा: प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों की ओर से हुई हिंसा और सार्वजनिक व निजी संपत्ति को पहुंचे नुकसान का आकलन किया जाएगा।
संवैधानिक सवालों पर खुद सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच कमेटी के पास आपराधिक जांच शुरू करने या एफआईआर (FIR) दर्ज करने का निर्देश देने का अधिकार नहीं होगा। कमेटी केवल उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों की पड़ताल कर रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की न्यायिक कार्रवाई तय होगी। इसके अलावा, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा ‘चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक’ (Facial Recognition) के इस्तेमाल जैसे व्यापक संवैधानिक मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट खुद अलग से सुनवाई करेगा।
संवेदनशील गवाहों की पहचान रहेगी गोपनीय
अदालत ने संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिया है कि उनके बयान, दस्तावेज और पहचान को पूरी तरह सार्वजनिक होने से बचाया जाए। कमेटी जरूरत पड़ने पर ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी आम लोगों से गोपनीय शिकायतें और साक्ष्य जुटा सकेगी।
नाबालिग को धमकी मामले में दिल्ली पुलिस को निर्देश
एक 14 वर्षीय नाबालिग प्रदर्शनकारी और उसके परिवार को मिली कथित धमकियों को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को तत्काल आरोपों की जांच करने और अगली सुनवाई पर ‘स्टेटस रिपोर्ट’ दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर 2026 को होगी।













