PM मोदी से मुलाकात का असर: बचपन के दोस्त असगर अली वोरा को मिली बड़ी राहत, बीजेपी विधायक ने छोड़ा जमीन से कब्जा

मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन के दोस्त असगर अली वोरा को उनकी 8 सितंबर को हुई मुलाकात के बाद एक बड़ी राहत मिली है। मुंबई से सटे भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में स्थित उनकी जमीन पर चल रहा लंबा विवाद आखिरकार सुलझ गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद बिल्डर और बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने जमीन पर से अपना दावा छोड़ने का निर्णय लिया है।
क्या था पूरा मामला?
असगर अली वोरा और पीएम मोदी ने गुजरात के वडनगर स्थित बी.एन. स्कूल में एक साथ पढ़ाई की थी। अपनी हालिया मुलाकात के दौरान वोरा ने प्रधानमंत्री को बताया था कि उन्होंने साल 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनका आरोप था कि 2011 में स्वयम् बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस (जिससे बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता जुड़े हैं) ने इस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया था। वोरा पिछले 15 सालों से न्याय के लिए सरकारी दफ्तरों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे।
मुलाकात के बाद एक्शन में आया प्रशासन
प्रधानमंत्री के सामने मामला उठने के बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी आई। मंगलवार को महाराष्ट्र मंत्रालय में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में असगर अली वोरा, बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर के नगर आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद रहे।
विधायक ने सरेंडर की निर्माण अनुमति, शिकायत भी ली वापस
बैठक के दौरान विधायक नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को आधिकारिक पत्र सौंपकर विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और प्लॉट के लिए पहले से मिली निर्माण अनुमति को सरेंडर करने की घोषणा की। मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने यह जमीन 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी। इसके साथ ही, उन्होंने पुलिस कमिश्नर को एक अलग पत्र भेजकर असगर अली वोरा के खिलाफ पहले दर्ज कराई गई शिकायत को वापस लेने की जानकारी दी।
इस घटनाक्रम के बाद पिछले एक दशक से अधिक समय से चल रहे इस जटिल जमीन विवाद का अंत हो गया है। दोनों पक्षों ने सर्वसम्मति से समझौते की पुष्टि की है।













