10 राज्यों की 26 साइबर ठगी से जुड़ा बैंक खाता, क्राइम ब्रांच ने खाताधारक को किया गिरफ्तार

इंदौर । साइबर ठगी की रकम के लेन-देन में इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों की जांच के दौरान इंदौर क्राइम ब्रांच को एक ऐसे खाते का पता चला है, जिसका कनेक्शन देश के 10 राज्यों में दर्ज 26 साइबर अपराध की शिकायतों से सामने आया है। पुलिस ने ऑपरेशन मैट्रिक्स-2 के तहत कार्रवाई करते हुए खाते के धारक तनिश को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, इस खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को प्राप्त करने और उसे आगे दूसरे खातों तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा था।
मामला बैंक ऑफ इंडिया की कस्तूरबा, तेजाजी नगर शाखा से जुड़े एक खाते की जांच के दौरान सामने आया। राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के बाद क्राइम ब्रांच ने खाते का मिलान आई4सी, एनसीआरपी और साइबर क्राइम पोर्टल पर दर्ज शिकायतों से किया। जांच में सामने आया कि इस एक खाते से जुड़े 26 शिकायतें अलग-अलग राज्यों में दर्ज हैं।
पुलिस के मुताबिक, शिकायतें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, असम, बिहार, गुजरात और हिमाचल प्रदेश से संबंधित हैं। अलग-अलग साइबर अपराधों की रकम इस खाते में आने और यहां से आगे ट्रांसफर होने के तथ्य मिलने के बाद पुलिस ने खाताधारक से पूछताछ की।
परिजनों के खातों में ट्रांसफर, एटीएम से भी निकाली रकम
पूछताछ में पुलिस के अनुसार तनिश ने बताया कि खाते में आने वाली रकम का एक हिस्सा उसके परिजनों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। वहीं कुछ रकम एटीएम के जरिए निकाली जाती थी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि एटीएम से निकाली गई रकम किसे और किस माध्यम से दी जाती थी।
क्राइम ब्रांच बैंक स्टेटमेंट, लेन-देन का विवरण और एटीएम से हुई निकासी की जानकारी जुटाकर पूरी मनी ट्रेल तैयार कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी की रकम खाते में कहां से आई और इसके बाद किन-किन खातों या लोगों तक पहुंची।
मनी ट्रेल से नेटवर्क के दूसरे लोगों की तलाश
जांच अब केवल खाताधारक की भूमिका तक सीमित नहीं है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि तनिश को बैंक खाता उपलब्ध कराने या खाते का इस्तेमाल करने के लिए किसने संपर्क किया था। खाते से जुड़े अन्य लोगों और रकम प्राप्त करने वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध में बैंक खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को अलग-अलग स्थानों और खातों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। ऐसे मामलों में लेन-देन की पूरी कड़ी सामने आने से रकम के स्रोत और अंतिम प्राप्तकर्ता तक पहुंचने में मदद मिलती है।
बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज
क्राइम ब्रांच ने तनिश के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है। गिरफ्तारी के बाद खाते के पुराने और हालिया लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस एटीएम से निकाली गई रकम, परिजनों के खातों में हुए ट्रांसफर और अन्य बैंक खातों में भेजी गई राशि का रिकॉर्ड खंगाल रही है।
10 राज्यों में दर्ज 26 शिकायतों से कनेक्शन सामने आने के बाद जांच का दायरा अंतरराज्यीय साइबर नेटवर्क तक पहुंच गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस खाते के जरिए कितने साइबर अपराधों की रकम का लेन-देन हुआ और तनिश के अलावा इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।













