कोटा बस्ती में राखड़ की समस्या पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी, पांच किलोमीटर प्रभावित मार्ग पर नियमित व्यवस्था की मांग

शक्तिनगर। कोटा बस्ती में राखड़ वाहनों के आवागमन से उत्पन्न समस्या को लेकर ग्रामीणों के विरोध के बाद एनटीपीसी प्रबंधन ने सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव और राखड़ की सफाई कराने का भरोसा दिया था। बुधवार को व्यवस्था शुरू होने के पहले ही दिन ग्रामीणों ने इसके प्रभावी ढंग से लागू नहीं होने को लेकर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक दोपहर करीब 12 बजे पानी का टैंकर मौके पर पहुंचा और एक चक्कर लगाने के बाद वापस चला गया। ग्रामीणों का कहना है कि जिस मात्रा और तरीके से पूरे प्रभावित मार्ग पर पानी का छिड़काव होना चाहिए था, उस तरह की व्यवस्था दिखाई नहीं दी। वहीं सड़क पर जमा राखड़ की सफाई भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सकी।
ग्रामीणों के अनुसार करीब पांच किलोमीटर के क्षेत्र में राखड़ की समस्या बनी हुई है। ऐसे में केवल औपचारिक रूप से पानी का छिड़काव करने के बजाय पूरे प्रभावित मार्ग पर नियमित और पर्याप्त पानी का छिड़काव तथा सड़क पर जमा राखड़ की सफाई आवश्यक है। उनका कहना है कि पहले दिन की व्यवस्था से लोगों को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी।
ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि सड़क पर जमा राख समय रहते साफ नहीं हुई और पर्याप्त पानी का छिड़काव नहीं किया गया तो राख सूखने के बाद दोबारा उड़ सकती है। इससे राहगीरों के साथ आसपास के घरों में रहने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि तीन दिनों के विरोध के बाद एनटीपीसी प्रबंधन के साथ हुई बैठक में समस्या के समाधान का भरोसा दिया गया था। अब जरूरत इस बात की है कि आश्वासन के अनुरूप जमीन पर नियमित और प्रभावी व्यवस्था दिखाई दे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहनी चाहिए और पूरे प्रभावित क्षेत्र में पानी के छिड़काव व राखड़ सफाई की स्थायी व्यवस्था की जानी चाहिए।













