आरटीआई के 21 साल बाद भी सूचना के लिए लंबा इंतजार, देशभर में 3.85 लाख मामले लंबित
मध्यप्रदेश में अपीलों के निपटारे की अनुमानित अवधि 19 साल से अधिक, बिना आदेश 37,701 मामले लौटाए जाने का दावा

नई दिल्ली/भोपाल। सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून लागू हुए 21 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन सूचना पाने के लिए नागरिकों को अब भी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सतर्क नागरिक संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून 2026 तक देश के 28 सूचना आयोगों में 3.85 लाख से अधिक अपीलें और शिकायतें लंबित थीं। रिपोर्ट में सूचना आयोगों में मामलों के निपटारे में हो रही देरी पर चिंता जताई गई है।
पारदर्शिता कार्यकर्ता कमोडोर लोकेश बत्रा (सेवानिवृत्त) के अनुसार, केंद्रीय सूचना आयोग में 1 जनवरी से 12 अक्टूबर 2026 के बीच लंबित मामलों की संख्या में 9,378 की वृद्धि दर्ज की गई।
मध्यप्रदेश में 19 साल से अधिक प्रतीक्षा का अनुमान
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 14 सूचना आयोगों में मामलों के निपटारे में कम से कम 1 साल या उससे अधिक समय लग रहा है। त्रिपुरा में अनुमानित प्रतीक्षा अवधि 19 साल 8 महीने, मध्यप्रदेश में 19 साल 2 महीने और छत्तीसगढ़ में लगभग 18 साल बताई गई है।
बिना आदेश लौटाए गए 37,701 मामले
रिपोर्ट में जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच 9 सूचना आयोगों द्वारा बिना आधिकारिक आदेश पारित किए 37,701 मामलों को लौटाए जाने का दावा किया गया है। इनमें केंद्रीय सूचना आयोग के 14,603, महाराष्ट्र के 14,140, बिहार के 4,417 और गुजरात के 3,276 मामले शामिल हैं। 5 आयोगों ने लौटाए गए मामलों का आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया।
तकनीकी कमियों के बजाय सुनवाई पर जोर
सतर्क नागरिक संगठन की संस्थापक अंजलि भारद्वाज ने कहा कि प्रारूप और पृष्ठ संख्या जैसी तकनीकी कमियों के आधार पर अपीलें लौटाना नागरिकों के लिए बाधा बन सकता है। संगठन से जुड़ी कार्यकर्ता अमृता जोहरी ने भी कहा कि गरीब और वंचित वर्ग के अनेक आवेदक कानूनी सहायता के बिना अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे में बुनियादी जानकारी उपलब्ध होने पर तकनीकी कमियों के बजाय अपीलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जानी चाहिए।रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े सूचना के अधिकार के प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित मामलों के समयबद्ध निपटारे की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।













