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मणिपुर ऐतिहासिक आंदोलनों , बांस के जंगल और तैरती झीलें के लिए प्रसिद्ध है

8,377 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैलें हैं बांस के जंगल, पाई जाती हैं 55 प्रजातियां

पोल खोल पोस्ट

मणिपुर प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम है। नगालैंड, मिजोरम, असम और म्यांमार की सीमाओं से घिरा यह राज्य अपने बांस के जंगलों, तैरती झीलों और ऐतिहासिक आंदोलनों के लिए जाना जाता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मणिपुर को “ऊंची ऊंचाइयों पर खिलता फूल”, “भारत का रत्न” और “पूर्व का स्विट्जरलैंड” कहा जाता है।

राज्य में करीब 8,377 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले बांस के जंगल हैं, जिनमें 55 प्रजातियां पाई जाती हैं। मणिपुर न केवल पूर्वोत्तर का बल्कि भारत का भी एक बड़ा बांस उत्पादक राज्य है। यहां देश के कुल बांस उत्पादन का करीब 14फीसदी हिस्सा तैयार होता है, जबकि पूर्वोत्तर में यह योगदान 25 फीसदी तक है।

हथकरघा उद्योग यहां का सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है, जिससे हजारों परिवार जुड़े हैं। राज्य का करीब 77फीसदी क्षेत्र वन और वृक्ष आवरण से ढका हुआ है।
रिपोर्ट के मुताबिक मणिपुर को मोरेह कस्बे के जरिए भारत के “पूर्व का प्रवेश द्वार” होने का गौरव हासिल है। यह भारत-म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच व्यापार का प्रमुख स्थल है।

चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बांस उत्पादक देश है, और मणिपुर इस योगदान में प्रमुख भूमिका निभाता है। यहां की लोकतक झील एशिया की अनोखी तैरती मीठे पानी की झील है। इसके किनारे स्थित किबुल लामजाओ राष्ट्रीय उद्यान दुनिया का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान है, जो मणिपुर के राज्य पशु संगाई हिरण का प्राकृतिक आश्रय स्थल है। यह झील रामसर कन्वेंशन और यूनेस्को की सूची में अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि के रूप में दर्ज है।

बता दें मणिपुर का प्राचीन नाम कंलैपाक था, जिसे पड़ोसी राज्यों ने “मोगली” और “मिक्ली” जैसे नामों से भी पुकारा। यह भूमि नगा आंदोलन की जन्मस्थली भी रही है। 1950 के दशक में शुरू हुआ यह आंदोलन नगा स्वायत्तता की मांग पर केंद्रित था। एनएससीएन (आई-एम) के नेता थुइंगलेंग मुइवा, जो सालों तक भूमिगत रहे, 22 अक्टूबर 2025 को अपने पैतृक गांव सोमदल लौटे, जहां हजारों लोगों ने उनका स्वागत किया।

स्वतंत्रता के बाद मणिपुर ने कई राजनीतिक परिवर्तन देखे। 1949 में भारत में विलय और 1972 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद यह लोकतांत्रिक ढांचे में मजबूत हुआ। आज यह राज्य न केवल अपनी प्राकृतिक संपदा से बल्कि अपनी संस्कृति, इतिहास और आत्मनिर्भरता की भावना से भी पूरे देश को प्रेरित कर रहा है।

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  • सुनील सोनी , " पोल खोल पोस्ट " डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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सुनील सोनी , " पोल खोल पोस्ट " डिजिटल न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक और संस्थापक सदस्य हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव है और वे निष्पक्ष एवं जनसेवा भाव से समाचार प्रस्तुत करने के लिए जाने जाते हैं।

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