जिले भर में ग्रामीण क्षेत्रों के शौंचालय हुए नष्ट,सामुदायिक शौंचालयों के तो ताले तक नहीं खुल रहे,खंडहर हो रहे सरकारी स्कूलों के शौंचालय…

जिले भर में ग्रामीण क्षेत्रों के शौंचालय हुए नष्ट,सामुदायिक शौंचालयों के तो ताले तक नहीं खुल रहे,खंडहर हो रहे सरकारी स्कूलों के शौंचालय…
पोल खोल पोस्ट सीधी न्यूज़
जिले भर में स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौंच को प्रतिबंधित करने के लिए हजारों शौंचालयों का निर्माण कार्य अभियान चलाकर कराया गया था। हैरत की बात तो ये है कि शौंचालय बनवाने के लिए जो ग्रामीण आरंभ में लगातार आगे आ रहे थे उनके यहां शौंचालय का निर्माण सरकारी मद से हो जाने के बाद वो देखभाल को लेकर उतने ही गैर जिम्मेदार ही नजर आए। इसी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए लाखों शौंचालय नष्ट हो चुके हैं। काफी कम संख्या में ही ग्रामीणों के घर में शौचालय उपयोग के लायक हैं। उसकी मुख्य वजह यही है कि उक्त ग्रामीण एवं उनके परिजन शौंचालय का लगातार उपयोग कर रहे थे तथा उसे व्यवस्थित बनाने में भी पूरा योगदान कर रहे थे।
ग्रामीण क्षेत्रों में शौंचालय निर्माण कराने के लिए तो ग्रामीण लगातार आगे आते रहे बाद में उनके द्वारा निर्मित कराए गए शौंचालय का उपयोग भी करना आवश्यक नहीं समझा गया। इसी लापरवाही एवं मनमानी के चलते शासन का करोड़ों रूपए खर्च होने के बाद भी आज भी लोग खुले में शौंच जा रहे हैं। ऐसे लोगों की मंशा ये नहीं है कि वो पक्के शौंचालय का उपयोग करें और उनके घर के सदस्य खुले में शौच के लिए न जाए। लोगों की सोच में बदलाव न होने के कारण सीधी जिला एवं उसमें शामिल सभी जनपद पंचायत क्षेत्र भले ही कागजों में ओडीएफ घोषित हो गए हो लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
उधर अधिकांश ग्रामीणों का कहना है कि उनके यहां जो शौंचालय बनाए गए थे वो काफी गुणवत्ताविहीन थे इस वजह से बनने के कुछ महीने बाद ही वह उपयोग के लायक नहीं रह गए। यदि ग्रामीणों की इन दलीलों पर यकीन किया जाय तो शासन को हर वर्ष इनके घरों में शौचालय का निर्माण कराना पड़ेगा और उसका उपयोग वह करेंगे इसकी कोई गारंटी नहीं रहेगी।
उधर ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य सडक़ों के समीप ग्राम पंचायतों के माध्यम से दो सैकड़ा से ज्यादा सीधी जिले में सामुदायिक शौंचालयों का निर्माण कार्य भी कराया गया है। सामुदायिक शौंचालयों की स्थिति तो और भी दयनीय बनी हुई है। इनके निर्माण में लाखों रूपए खर्च होने के बाद भी उनका उपयोग नहीं हो पाया और यह ताले में पूरी तरह से कैद हैं। बताया गया है कि सामुदायिक शौंचालयों की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा है। ग्राम पंचायतों के हाथ खड़ा कर लेेने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा महिला समूहों को जिम्मेदारी देने का प्रयास किया गया किन्तु उनके द्वारा भी सामुदायिक शौंचालयों का संचालन करने में कोई रूचि नहीं प्रदर्शित की गई। इसी वजह से सामुदायिक शौंचालयों का उपयोग दो वर्ष बाद भी सीधी जिले में सुनिश्चित नहीं हो सका है।
लोगों को जागरूक करना आवश्यक
जिले में खुले में शौंच पर प्रतिबंध लगाने के लिए शासन द्वारा आरंभ में जिस तरह से अभियान चलाया गया था उसके कुछ नतीजे सामने आ रहे थे। बाद में सभी जनपद पंचायत क्षेत्रों को कागजों में तो ओडीएफ घोषित कर दिया गया लेकिन लोगों को जागरूक करने का प्रयास जो शुरू किया गया था उसे अचानक बंद कर दिया गया। नतीजन लोग फिर से गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए खुले में शौंच जाने लगे। जिसके चलते आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग खुले में ही शौंच के लिए जा रहे हैं। शासन द्वारा सभी ग्राम पंचायत क्षेत्रों मेंं अभियान चलाकर हजारों शौंचालयों का निर्माण कार्य घर-घर कराया गया था। बाद में ग्रामीणों द्वारा शौंचालय का निर्माण हो जाने के बाद उनका उपयोग करने की वजाय उनमें गोबर, लकड़ी या फिर घर के कबाड़ रखना शुरू कर दिया गया। बिना उपयोग किए ही हजारों शौंचालय धीरे- धीरे धराशायी होना शुरू हो गए। यदि ग्रामीण क्षेत्रों का जायजा लिया जाय तो स्पष्ट मिलेगा कि अधिकांश घरों में शौंचालय तो बने लेकिन इनका उपयोग न करने से वह धीरे-धीरे धराशायी होना शुरू हो गए। ग्रामीणों की कोई भी मंशा शौंचालय का उपयोग करने की आरंभ से ही नहीं रही। जब तक लोगों की सोच नहीं बदलती शासन के प्रयासों से खुले में शौंच जाने पर कोई भी रोक नहीं लगाई जा सकती।
चर्चा के दौरान कुछ ग्रामीणों ने भी कहा कि शासन द्वारा शौंचालय का निर्माण कराने में हजारों करोड़ रूपए पानी की तरह खर्च किए गए लेकिन लोगों की जागरूक न होने के कारण बनाए गए शौंचालयों का उपयोग ही सुनिश्चित नहीं हो सका। ऐसे में जब तक लोग खुले में शौंच के दुष्प्रभावों को लेकर स्वयं जागरूक नहीं होंगे यह प्रथा बंद नहीं हो सकती। लोगों की मानसिकता को बदलने के लिए जागरूकता अभियान चलाने के साथ ही पंचायत स्तर पर ही कार्यवाही भी सुनिश्चित होनी चाहिए जिसके बाद ही इसके सार्थक नतीजे लोगों के सामने आ सकते हैं।













