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इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जलापूर्ति से हैजा जैसी बीमारी का खतरा, विशेषज्ञों ने प्रशासन से की तत्काल कार्रवाई की अपील

इंदौर: भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जलापूर्ति के कारण हैजा (कॉलरा) जैसी गंभीर जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. ए. के. द्विवेदी ने इस संबंध में प्रशासन को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने जिला कलेक्टर, इंदौर संभागायुक्त, और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर इस स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।

डॉ. द्विवेदी ने अपने पत्र में बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में लंबे समय से दूषित जलापूर्ति की शिकायतें मिल रही हैं, जिससे हैजा सहित अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल शुद्धिकरण, स्वच्छता नियंत्रण और चिकित्सकीय रोकथाम के ठोस उपाय नहीं किए गए, तो यह स्थिति गंभीर जनस्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

होम्योपैथिक चिकित्सा के उपाय
पत्र में डॉ. द्विवेदी ने कहा कि हैजा एक अत्यंत संक्रामक जलजनित रोग है, जिसमें त्वरित हस्तक्षेप और जन-जागरूकता जरूरी है। उन्होंने बताया कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में हैजा और तीव्र दस्त-उल्टी जैसी स्थितियों के लिए प्रभावी और सुरक्षित औषधियां उपलब्ध हैं। इन औषधियों को आधुनिक चिकित्सा और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों के पूरक रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

डॉ. द्विवेदी ने कैम्पफोरा, वेराट्रम एल्बम, आर्सेनिकम एल्बम, इपेकाकुआन्हा और क्यूप्रम मेटैलिकम जैसी होम्योपैथिक औषधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये दवाएं लक्षणों के अनुसार और आयुष विभाग द्वारा प्रशिक्षित चिकित्सकों की निगरानी में प्रभावी हो सकती हैं।

आवश्यक कदम उठाने की अपील
डॉ. द्विवेदी ने प्रशासन से आग्रह किया कि शासकीय आयुष विभाग के माध्यम से प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में होम्योपैथिक औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीमें तैनात कर जन-परामर्श और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरी प्रक्रिया नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और आधुनिक चिकित्सा तंत्र के समन्वय से संचालित की जानी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को शीघ्र और प्रभावी राहत मिल सके।

समन्वित प्रयासों की आवश्यकता
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन, चिकित्सकीय, आयुष और जनस्वास्थ्य स्तर पर समन्वित प्रयास किए गए, तो हैजा जैसे प्रकोप को रोका जा सकता है और जनहानि से बचाव संभव है। उन्होंने जनहित में शीघ्र निर्णय लेने और आवश्यक निर्देश जारी करने की अपील की है।

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