दुष्कर्म के आरोपी को शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास की सजा…

दुष्कर्म के आरोपी को शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास की सजा…
सीधी: बताया गया कि दिनांक 10.08.2024 को अवयस्क अभियोक्त्री अपनी मौसी के घर उनके ग्राम मौसी की लड़की के बुलाने पर गई थी। मौसी की लड़की ने उसे फोन करके बताया था कि आरोपी- X को उसे लेने के लिए भेजेगी तो उनके साथ आना है। तब अभियोक्त्री, आरोपी-X के साथ उसकी बाईक से मौसी के घर घूमने के लिए गई तो रास्ते में करीब रात्रि 09:00 बजे आरोपी आंगनबाड़ी केन्द्र के पास अमरपुर में उसके साथ जबरदस्ती गलत काम (बलात्संग) किया और अभियोक्त्री ने मना किया तो आरोपी ने उसे किसी को बताने पर मार डालने की धमकी दी।
अभियोक्त्री ने डर के कारण किसी को नहीं बताया फिर दिनांक 14.08.2024 के शाम 04:00 बजे जब मौसी के घर में कोई नहीं था तो आरोपी- X आया और अभियोक्त्री के साथ गलत करने की कोशिश करने लगा तो अभियोक्त्री हल्ला करने लगी जिससे अभियोक्त्री की मौसी की लड़के के चाचा आ गये तब आरोपी- X उसे छोड़ दिया फिर अभियोक्त्री ने अपनी मौसी और उनकी लड़कियों को घटना बतायी तो उन्होंने उसका विश्वास नहीं किया फिर अभियोक्त्री ने दिनांक 16.07.2024 को आरोपी- X का चुपके से फोन लेकर अपनी मम्मी को फोन लगाकर सारी बात बतायी तो अगले दिन उसकी मम्मी उसे उसकी मौसी के घर से लेकर अपने ग्राम आ गई फिर अभियोक्त्री ने अपनी मां के साथ थाना जाकर रिपोर्ट की। उक्त रिपोर्ट पर थाना बहरी में अपराध क्रमांक 0530/2024 धारा-65(1), 64(2)(एफ), 351(3) भा.न्या.सं. एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम धारा-3/4(2), 5(एन)/6 के अंतर्गत पंजीबद्ध किया गया एवं मामला विवेचना में लिया गया।
संपूर्ण विवेचना पश्चात् अभियोग पत्र तैयार कर माननीय विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट सीधी में प्रस्तुत किया गया। जिसके न्यायालयीन विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 68/2024 में शासन की ओर से सशक्त पैरवी करते हुए सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री प्रशान्त कुमार पाण्डेय के द्वारा अभियुक्त को संदेह से परे प्रमाणित कराया गया, जिसके परिणामस्वरूप माननीय न्यायालय विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट सीधी के द्वारा अभियुक्त-X को धारा 65(1) बीएनएस एवं धारा 5(एन)/6 एवं 18 पॉक्सो एक्ट में दोषसिद्ध करते हुए आजीवन कारावास जिसका अभिप्राय आरोपी के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास होगा तथा कुल 25,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। साथ ही अर्थदण्ड की संपूर्ण राशि 25,000/-रूपये अभियोक्त्री को अपील अवधि पश्चात अपील न होने की स्थिति में अभियोक्त्री को क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान किये जाने का आदेश पारित किया गया। इसके अतिरिक्त जाये। इसके अतिरिक्त अभियोक्त्री को 1,00,000/- (एक लाख रूपये) प्रतिकर के रूप में अदा किये जाने के परिप्रेक्ष्य में सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला सीधी म.प्र. को पत्र सहित निर्णय की प्रति प्रेषित की गई।













