वनांचल कुसमी में 31 करोड़ के भवन निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार, नाला की चोरी की रेत और घटिया सामग्री से हो रहा निर्माण…

वनांचल कुसमी में 31 करोड़ के भवन निर्माण में बड़ा भ्रष्टाचार, नाला की चोरी की रेत और घटिया सामग्री से हो रहा निर्माण…
अमित श्रीवास्तव पोल खोल कुसमी
सीधी/कुसमी।
वनांचल क्षेत्र कुसमी में करोड़ों रुपये की लागत से हो रहे शासकीय भवन निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। स्थल पर लगे शिलान्यास बोर्ड की जानकारी और ग्रामीणों की शिकायतों के अनुसार, इस कन्या शिक्षा परिसर भवन निर्माण कार्य के लिए 3100.15 लाख रुपये (31 करोड़ से अधिक) की स्वीकृति दी गई है, लेकिन गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों की मानें तो यह भवन कई वर्षों से बन रहा है, लेकिन नियमानुसार लगाया जाने वाला शिलान्यास/सूचना बोर्ड लंबे समय तक एकांत में पड़ा रहा, जिससे काम की जानकारी आमजन से छिपाई जाती रही। अब जब बोर्ड सामने आया है, तो उसमें दर्ज तथ्यों और जमीनी हकीकत के बीच भारी अंतर दिख रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा रौहाल–हडगड नाला सहित आसपास के नालों से अवैध रूप से रेत की चोरी कराई जा रही है। यही नहीं, निर्माण में राखड़ (मिलावटी) रेत का उपयोग कर घटिया गुणवत्ता का कार्य किया जा रहा है, जिससे भवन की मजबूती और दीर्घायु पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि रेत चोरी के दौरान एक युवक की मौत तक हो चुकी है। इसके बावजूद ठेकेदार पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, मामले में पुलिस द्वारा ठेकेदार के लोगों को बैठाए जाने (पूछताछ/हिरासत) की बात सामने आई है, लेकिन निर्माण की अनियमितताएं आज भी जारी बताई जा रही हैं।
फोटो में दर्ज विवरण के अनुसार निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग से संबंधित है और कार्यपालन यंत्री व विभागीय अमले की निगरानी में होना चाहिए। ऐसे में तकनीकी स्वीकृति, गुणवत्ता परीक्षण, सामग्री जांच और कार्य प्रगति पर निगरानी की जिम्मेदारी निभाई जा रही है या नहीं, यह बड़ा सवाल बन गया है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, कलेक्टर और उच्च स्तरीय जांच एजेंसियों से मांग की है कि निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, रेत चोरी और मिलावटी सामग्री के उपयोग पर तत्काल रोक लगे, दोषी ठेकेदार व जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा निर्माण की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह करोड़ों रुपये की सार्वजनिक राशि की बर्बादी के साथ-साथ वनांचल क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा साबित हो सकता है।













