गजरा बहरा कोलयार्ड से उड़ती धूल बनी आफत: फसलें बर्बाद, लोग खांसी-दमा से परेशान; कार्रवाई के इंतजार में ग्रामीण

सिंगरौली। जिले के आदिवासी बहुल इलाके में स्थित गजरा बहरा कोलयार्ड से फैल रहे प्रदूषण ने आसपास के गांवों के लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। कोलयार्ड से उड़ने वाली कोयले की धूल के कारण न केवल किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं, बल्कि ग्रामीणों को खांसी, सांस और दमा जैसी गंभीर बीमारियों का सामना भी करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कोलयार्ड संचालक द्वारा धूल नियंत्रण के लिए न तो नियमित पानी का छिड़काव किया जा रहा है और न ही पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन किया जा रहा है। इसके कारण कोलयार्ड और मुख्य सड़क के आसपास धूल का गुबार लगातार उड़ता रहता है। सड़क पर जमी डस्ट के कारण कई बार वाहन चालकों को रास्ता साफ दिखाई नहीं देता, जिससे हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि कोलयार्ड से उड़ने वाली धूल खेतों तक पहुंच रही है, जिससे फसलों की पत्तियां काली पड़ रही हैं और उत्पादन पर भी असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि मेहनत से उगाई गई फसलें प्रदूषण की भेंट चढ़ रही हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रदूषण विभाग की कार्रवाई पर सवाल
मामले को लेकर मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कोलयार्ड संचालक अपनी मनमानी कर रहे हैं और नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
हालांकि प्रदूषण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोलयार्ड संचालक के खिलाफ डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया जा चुका है। बताया जा रहा है कि इस कार्रवाई के खिलाफ कोलयार्ड संचालक ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया है, जिसके कारण मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है। इसी वजह से आगे की कार्रवाई फिलहाल रुकी हुई बताई जा रही है।
बीमारी और हादसों से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद प्रशासन को लोगों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने चाहिए। उनका आरोप है कि आदिवासी क्षेत्र होने के कारण यहां के गरीब परिवारों की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार कोलयार्ड से उठने वाली धूल के कारण बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं लगातार बीमार हो रहे हैं। कई लोग खांसी और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। वहीं सड़क पर धूल के कारण छोटे-बड़े हादसे भी सामने आ रहे हैं।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। लोगों का कहना है कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो कोलयार्ड को बंद कराने के लिए बड़ा जन आंदोलन भी किया जा सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और प्रदूषण विभाग को तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कोलयार्ड संचालकों को नियमों का पालन करने के लिए बाध्य करना चाहिए, ताकि लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण की रक्षा की जा सके।













