राख डैम बना मुसीबत: बलियरी वार्ड-38 में उड़ती राख से जनजीवन प्रभावित

सिंगरौली। जिले के तुलसी वार्ड बलियरी (वार्ड-38) में स्थित एनटीपीसी विन्ध्याचल का फ्लाई ऐश डैम स्थानीय रहवासियों के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। करीब 500 एकड़ में फैले इस राख डैम से उड़ने वाली राख आसपास की बस्तियों में पहुंचकर लोगों के स्वास्थ्य और रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हल्की हवा चलते ही राख का गुबार उठने लगता है, जिससे सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। राख घरों, सड़कों और खेतों में जम रही है, जिससे विशेषकर बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
स्प्रिंकल सिस्टम पर सवाल
एनटीपीसी प्रबंधन का दावा है कि राख डैम में धूल नियंत्रण के लिए स्प्रिंकल सिस्टम लगाया गया है, जिससे राख उड़ने की संभावना नहीं रहती। हालांकि, जमीनी स्थिति इन दावों के विपरीत नजर आ रही है और लगातार उड़ती राख प्रबंधन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर रही है।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र में सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन, त्वचा रोग और फेफड़ों की समस्याएं बढ़ रही हैं। प्रदूषण के कारण लोगों का जीना दूभर हो गया है।
यातायात और खेती भी प्रभावित
राख ढोने वाले भारी वाहन संकरी गलियों से गुजरते हैं, जिससे जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। वहीं राख युक्त पानी खेतों और नालों में पहुंचने से मिट्टी की उर्वरता भी घट रही है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
शिकायतों के बावजूद नहीं सुधार
ग्रामीणों का आरोप है कि वे कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। क्षेत्रवासियों का कहना है कि देश के प्रमुख पावर प्लांट्स में शामिल एनटीपीसी विंध्याचल में राख प्रबंधन को लेकर लंबे समय से लापरवाही बरती जा रही है।
रहवासियों ने जिला प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन से मांग की है कि जल्द ठोस कदम उठाए जाएं, अन्यथा बलियरी का यह इलाका “राख का गांव” बनकर रह जाएगा।













