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निर्वाचन आयोग और टीएमसी के बीच तीखी तकरार, बैठक में आरोप-प्रत्यारोप से बढ़ा सियासी तनाव

नई दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग और तृणमूल कांग्रेस के बीच चल रहा विवाद बुधवार को उस समय और गहरा गया, जब दिल्ली स्थित आयोग मुख्यालय में हुई बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हो गई। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।

टीएमसी प्रतिनिधिमंडल, जिसमें डेरेक ओ’ब्रायन, सागरिका घोष और साकेत गोखले शामिल थे, आयोग से मुलाकात करने पहुंचा था। उनका उद्देश्य राज्य में चुनावी अधिकारियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाना और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा लिखे गए पत्रों पर चर्चा करना था।

बैठक के बाद टीएमसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। डेरेक ओ’ब्रायन ने दावा किया कि बैठक के दौरान उन्हें “गेट लॉस्ट” कहकर अपमानित किया गया। उन्होंने आयोग से बैठक का ट्रांसक्रिप्ट सार्वजनिक करने की मांग भी की।

वहीं, आयोग के सूत्रों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बैठक के दौरान डेरेक ओ’ब्रायन ने अमर्यादित व्यवहार किया और आवाज ऊंची की। आयोग का कहना है कि केवल शिष्टाचार बनाए रखने की अपील की गई थी।

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने मतदाता सूची से कथित रूप से 91 लाख नाम हटाए जाने पर भी सवाल उठाए और इसे साजिश बताया। उन्होंने इस मुद्दे पर अदालत जाने की बात कही है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों को लेकर माहौल पहले ही संवेदनशील बना हुआ है। ऐसे में आयोग और सत्ताधारी दल के बीच बढ़ता टकराव चुनावी प्रक्रिया पर असर डाल सकता है।

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