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सावधान! लावारिस बच्चे की सूचना न देने पर होगी सजा

अस्पतालों और नर्सिंग होम को दिए गए सख्त निर्देश, कानून का कड़ा प्रावधान लागू

सिंगरौली ; जिले में लावारिस, गुमशुदा या असहाय बच्चों के संरक्षण को लेकर बाल कल्याण समिति (CWC) ने सख्त रुख अपनाया है। समिति ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 0 से 18 वर्ष तक का कोई भी बच्चा यदि असहाय या लावारिस स्थिति में मिलता है, तो इसकी सूचना 24 घंटे के भीतर पुलिस या संबंधित प्रशासन को देना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बाल कल्याण समिति ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र जारी कर जिले के सभी शासकीय एवं निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और स्वास्थ्य संस्थानों को इस नियम से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं। उद्देश्य यह है कि किसी भी बच्चे के मामले में लापरवाही न हो और समय रहते उसे संरक्षण एवं आवश्यक सहायता मिल सके।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रामदयाल पाण्डेय ने कहा कि बालकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी संस्था या व्यक्ति लावारिस या संकटग्रस्त बच्चे की जानकारी छुपाता है, तो यह गंभीर अपराध माना जाएगा।

किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत ऐसे मामलों में सूचना न देना दंडनीय अपराध है। नियमों के उल्लंघन पर दोषी को 6 माह तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है। समिति ने कहा कि यह कदम बच्चों के हितों की रक्षा और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है।

इस निर्देश पर बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष रामदयाल पाण्डेय के साथ सदस्य पूनम मिश्रा, देवेश प्रसाद शर्मा, पूनम त्रिपाठी एवं रीना सिंह परिहार के हस्ताक्षर भी हैं। सभी ने एक स्वर में कहा कि हर जरूरतमंद बच्चे तक समय पर सहायता पहुंचाना प्रशासन और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी है।

बाल कल्याण समिति ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें कहीं भी कोई बच्चा असहाय, लावारिस या संकट में दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस या चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) पर दें, ताकि बच्चे को सुरक्षित वातावरण और आवश्यक संरक्षण मिल सके।

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