भारत ने उन्नत अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया, बढ़ी सामरिक ताकत

नई दिल्ली। भारत ने अपनी सामरिक और परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को नई मजबूती देते हुए बहु-स्वतंत्र लक्ष्यभेदी पुनःप्रवेश प्रौद्योगिकी (एमआईआरवी) से लैस उन्नत Agni-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को इसकी आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि यह परीक्षण ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण के दौरान मिसाइल को कई पेलोड के साथ प्रक्षेपित किया गया, जिन्हें हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर मौजूद लक्ष्यों की ओर निर्देशित किया गया था। परीक्षण में तय सभी मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया गया। मिसाइल की पूरी उड़ान पर नजर रखने के लिए जमीन और समुद्र आधारित कई ट्रैकिंग स्टेशनों का इस्तेमाल किया गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक एमआईआरवी तकनीक से लैस यह मिसाइल एक साथ कई अलग-अलग लक्ष्यों पर परमाणु वारहेड पहुंचाने में सक्षम है। हालांकि सरकार ने आधिकारिक तौर पर इसकी क्षमता का खुलासा नहीं किया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह चार से पांच परमाणु वारहेड ले जा सकती है।
रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस सफलता को देश की रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे बदलते सुरक्षा परिदृश्य में भारत की सामरिक शक्ति और मजबूत होगी। इससे पहले मार्च 2024 में भारत ने पहली बार एमआईआरवी तकनीक से लैस अग्नि-5 का सफल परीक्षण किया था, जिसे प्रधानमंत्री Narendra Modi ने “मिशन दिव्यास्त्र” नाम दिया था।
तीन चरणों वाले ठोस ईंधन इंजन से लैस अग्नि-5 की मारक क्षमता 5000 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है। इसे Defence Research and Development Organisation ने विकसित किया है। अग्नि श्रृंखला में अग्नि-1, अग्नि-2, अग्नि-3 और अग्नि-4 जैसी मिसाइलें भी शामिल हैं, जिनकी मारक क्षमता क्रमशः 700, 2000, 3000 और 4000 किलोमीटर तक है।
भारत की परमाणु नीति “पहले उपयोग नहीं” के सिद्धांत पर आधारित है। इसके तहत भारत केवल जवाबी कार्रवाई में परमाणु हथियारों का उपयोग करेगा। हाल ही में भारतीय नौसेना ने परमाणु ऊर्जा से संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridaman को भी सेवा में शामिल किया है। इसके साथ भारत पूर्ण परमाणु त्रिकोणीय क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है।
रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अग्नि-5 के इस सफल परीक्षण से एशिया में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारत की सैन्य शक्ति और प्रतिरोधक क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।













