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सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेगी जजों की संख्या

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब कुल 38 जज होंगे, लंबित मामलों के निपटारे में मिलेगी तेजी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश की न्याय व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी गई है। यानी अब सुप्रीम कोर्ट में कुल 38 न्यायाधीश कार्यरत होंगे।

केंद्रीय कानून मंत्री Arjun Ram Meghwal ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ने “सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अध्यादेश, 2026” को मंजूरी दे दी है। इसके तहत सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन किया गया है।

इससे पहले प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5 मई को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। सरकार का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ रहे लंबित मामलों और बढ़ते न्यायिक कार्यभार को देखते हुए जजों की संख्या बढ़ाना जरूरी हो गया था। वर्ष 2019 में आखिरी बार जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी।

कानूनी समुदाय ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता Vikas Singh ने कहा कि बढ़ते मामलों के बीच यह समय की जरूरत थी। वहीं दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष Sachin Puri ने इसे लंबित मामलों के त्वरित निपटारे की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता Sumit Gehlot ने भी फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा। बेहतर केस मैनेजमेंट और तकनीकी सुधारों की भी आवश्यकता है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में करीब 95 हजार मामले लंबित बताए जा रहे हैं।

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