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महर्षि आश्रम जमीन घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई

फर्जी दस्तावेजों से करोड़ों की जमीन बेचने का आरोप, दो आरोपी गिरफ्तार

जबलपुर। Enforcement Directorate ने महर्षि महेश योगी आश्रमों की जमीनों में हुए कथित फर्जीवाड़े और अवैध बिक्री मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने जी रामचंद्र मोहन और आकाश मालवीय को हिरासत में लिया है। दोनों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर आश्रम की कीमती जमीनों का अवैध सौदा करने का आरोप है।

प्रारंभिक जांच में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जिसमें कई प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता होने की आशंका जताई जा रही है।

चार शहरों की जमीनें थीं निशाने पर

जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने मुख्य रूप से Jabalpur, Bilaspur, Raipur और Noida में स्थित आश्रमों की बहुमूल्य जमीनों को निशाना बनाया था। जाली दस्तावेजों के जरिए इन संपत्तियों की खरीद-फरोख्त की कोशिश की जा रही थी। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस अवैध कारोबार से अर्जित करोड़ों रुपए कहां ट्रांसफर किए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने दिए एसआईटी जांच के आदेश

मामले को लेकर महर्षि संस्थान ने Supreme Court of India में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति J.K. Maheshwari और न्यायमूर्ति Atul Chandurkar की पीठ ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गंभीर चिंता जताई कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मामले लंबित होने के बावजूद संपत्तियों की बिक्री कैसे हो गई। अदालत ने बिना अनुमति बेची गई जमीनों की जांच कर तीन महीने के भीतर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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