भारत-नीदरलैंड संबंधों को मिला रणनीतिक साझेदारी का दर्जा
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे में रक्षा, सेमीकंडक्टर, जल प्रबंधन और ऊर्जा समेत कई अहम समझौते

द हेग। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दो दिवसीय नीदरलैंड दौरे के दौरान डच प्रधानमंत्री रॉब जेटन, किंग विलेम-अलेक्जेंडर और क्वीन मैक्सिमा से मुलाकात की। इस दौरान भारत और नीदरलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ाने का ऐतिहासिक फैसला लिया।
हेग स्थित रॉयल पैलेस हुइस टेन बॉश में हुई बैठकों में दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा परिवर्तन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
दोनों नेताओं ने लोकतंत्र, मानवाधिकार और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और भारत की स्थायी सदस्यता के लिए नीदरलैंड के समर्थन को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर
दौरे के दौरान रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर तकनीक, माइग्रेशन और मोबिलिटी, क्रिटिकल मिनरल्स, जल प्रबंधन, ग्रीन हाइड्रोजन और नवीकरणीय ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए।
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और एएसएमएल के बीच धोलेरा सेमीकंडक्टर फैब परियोजना को सहयोग देने के लिए समझौता हुआ। वहीं गुजरात के कल्पसर प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी सहयोग पर भी सहमति बनी।
कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में बढ़ेगा सहयोग
कृषि और पशुपालन क्षेत्र में वेस्ट त्रिपुरा में इंडो-डच सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा बेंगलुरु में डेयरी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने पर सहमति बनी। स्वास्थ्य क्षेत्र में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और डच संस्थान आरआईवीएम के बीच सहयोग समझौता हुआ।
उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नालंदा विश्वविद्यालय, यूनिवर्सिटी ऑफ ग्रोनिंगन, लेडेन यूनिवर्सिटी लाइब्रेरीज और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बीच भी अकादमिक और सांस्कृतिक सहयोग संबंधी समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
प्रधानमंत्री मोदी का यह नीदरलैंड का दूसरा दौरा था, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।













