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चितरंगी अस्पताल में बड़ी लापरवाही का आरोप, गार्ड द्वारा मरीज को इंजेक्शन लगाने का मामला सामने आया

 

सिंगरौली। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चितरंगी में कथित रूप से एक सुरक्षा गार्ड द्वारा मरीज को ग्लूकोज का इंजेक्शन लगाए जाने का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। घटना की जानकारी क्षेत्र में फैलते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त हो गया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अस्पताल परिसर में तैनात एक सुरक्षा गार्ड को मरीज के उपचार संबंधी कार्य करते हुए देखा गया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि गार्ड ने मरीज को ग्लूकोज का इंजेक्शन लगाया। बताया जा रहा है कि उस समय अस्पताल में संबंधित चिकित्सा कर्मियों की अनुपस्थिति या लापरवाही के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से मामले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल में कर्मचारियों की कमी और अव्यवस्था की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे मरीज की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और चिकित्सक समय पर उपलब्ध रहते तो किसी सुरक्षा गार्ड को उपचार संबंधी कार्य करने की नौबत नहीं आती।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इंजेक्शन लगाना, ड्रिप चढ़ाना अथवा किसी भी प्रकार की चिकित्सा प्रक्रिया केवल प्रशिक्षित और अधिकृत चिकित्सा कर्मियों द्वारा ही की जानी चाहिए। बिना प्रशिक्षण के इस प्रकार का कार्य मरीज के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने पर संक्रमण, एलर्जी, नसों को नुकसान या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

कानूनी जानकारों के अनुसार बिना आवश्यक योग्यता और पंजीकरण के चिकित्सा कार्य करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है।
घटना के बाद क्षेत्रीय नागरिकों एवं सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सुरक्षा गार्ड को मरीज के उपचार संबंधी कार्य करने की अनुमति किसने दी तथा घटना के समय ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी कहां थे।
फिलहाल पूरे मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। जांच के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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