250 एकड़ सरकारी जमीन पर फर्जी पट्टे का आरोप, न्याय की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे कतरिहार के ग्रामीण

सिंगरौली : जिले के चितरंगी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कतरिहार गांव के दर्जनों ग्रामीण गुरुवार को न्याय की गुहार लगाने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने गांव के ही पूर्व सरपंच रामनरेश गुर्जर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पद का दुरुपयोग कर 250 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन का फर्जी पट्टा अपने परिजनों के नाम करवा लिया है।
ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व सरपंच रामनरेश गुर्जर ने अपने दादा रामरूप, माता गोन्ही, बहन राधिका और परिवार के अन्य सदस्यों (गणपत, रामसहाय, भुवाली तथा रामरक्षा गुर्जर) के नाम पर शासकीय भूमि के फर्जी पट्टे तैयार करवाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि इस जमीन पर गोंड, बैगा, अगरिया, गुर्जर, जैसवाल और नाई सहित विभिन्न गरीब समुदायों के लोग पीढ़ियों से खेती कर अपनी जीविका चला रहे हैं।
स्थानीय निवासी यमुना प्रसाद ने बताया:”ग्रामीण पिछले 10 महीनों से लगातार प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पूर्व में कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम चितरंगी ने इस मामले की जांच की थी और कथित फर्जी पट्टों को निरस्त भी कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड (भू-अभिलेख) से संबंधित आरोपियों के नाम अभी तक नहीं हटाए गए हैं, जिसका फायदा आरोपी उठा रहे हैं।”
ग्रामीण भोला ने आरोप लगाया कि कुछ महीने पहले जेल से जमानत पर छूटने के बाद रामनरेश गुर्जर, उनका भाई कमलेश गुर्जर और अन्य परिजन ग्रामीणों को लगातार डरा-धमका रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी उन्हें खेतों में फसल काटने से रोक रहे हैं और विरोध करने पर खुलेआम जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, इस संबंध में स्थानीय थाना और पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय में कई बार लिखित शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन अब तक आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं हुई है। आरोपी खुलेआम पुलिस और प्रशासन पर अपने राजनीतिक प्रभाव की धौंस जमाते हैं।
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों ने मांग की है कि फर्जी पट्टे के आधार पर दर्ज सभी नाम तत्काल राजस्व रिकॉर्ड से हटाए जाएं और आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए, ताकि ग्रामीण भयमुक्त होकर अपना जीवन जी सकें।
इस मामले पर जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। शासकीय भूमि पर फर्जी पट्टा कराने के आरोपों की तकनीकी जांच के बाद जल्द ही एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।













