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बिना मुआवजा मकान गिराने का आरोप, रेलवे परियोजना पर उठे सवाल

सिंगरौली/ तहसील देवसर के ग्राम हर्राचंदेल में रेलवे परियोजना निर्माण के दौरान एक मकान को बिना मुआवजा दिए गिराए जाने का आरोप सामने आया है। मामले में प्रभावित पक्ष ने निष्पक्ष जांच कराने, विधिसम्मत भू-अर्जन प्रक्रिया अपनाने तथा उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।

आवेदक कमलेश यादव का आरोप है कि आरजी क्रमांक 403/3/1 पर स्थित उनके मकान को पूर्ण भू-अर्जन प्रक्रिया और मुआवजा भुगतान किए बिना ध्वस्त कर दिया गया। उनका कहना है कि कार्रवाई के दौरान रेलवे विभाग के कर्मचारी मनोज कुमार, पंकज कुमार, ठेकेदार के प्रोजेक्ट मैनेजर साहू एवं सत्य प्रकाश सहित अन्य लोग मौजूद थे। वहीं, रेलवे विभाग में कार्यरत बलजीत रावत, जो पूर्व में देवसर में राजस्व निरीक्षक रह चुके हैं, की भूमिका की भी जांच कराने की मांग उठाई गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना के लिए निजी भूमि का उपयोग किए जाने से पहले नियमानुसार भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी करना, अधिसूचना जारी करना तथा प्रभावित व्यक्ति को उचित मुआवजा देना आवश्यक है। उनका दावा है कि यदि ऐसा नहीं किया गया है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

आवेदक ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि आरजी क्रमांक 403/3/1 की भूमि के अभिलेखों एवं भू-अर्जन प्रक्रिया की जांच कराई जाए। यदि भूमि रेलवे परियोजना के लिए आवश्यक है तो नियमानुसार क्रय नीति अथवा भू-अर्जन की प्रक्रिया के तहत मुआवजा प्रदान किया जाए। साथ ही, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और मुआवजा भुगतान तक संबंधित भूमि पर निर्माण कार्य रोकने तथा मकान गिराने की कार्रवाई की जांच कराने की मांग भी की गई है।

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