17 आपराधिक मामलों के बावजूद मिली जमानत: हाई कोर्ट ने साक्ष्यों की मजबूती को माना आधार

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल लंबा आपराधिक रिकॉर्ड होने मात्र से किसी आरोपित की जमानत स्वतः निरस्त नहीं की जा सकती। बैतूल निवासी अमन उर्फ चमन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने उसे 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।
आरोपित के खिलाफ 17 आपराधिक मामले दर्ज थे, जिसके आधार पर राज्य शासन ने जमानत का कड़ा विरोध किया। हालांकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता शंतनु तिवारी ने तर्क दिया कि वर्तमान मामले में अभियोजन का मुख्य आधार पहचान संबंधी साक्ष्य है, जिसमें गंभीर त्रुटियां हैं। पुलिस ने चश्मदीदों से टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (टीआईपी) नहीं कराई, जिससे पहचान पर संदेह उत्पन्न होता है।
अदालत ने केस डायरी और तथ्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि जमानत पर निर्णय लेने के लिए केवल पिछला रिकॉर्ड पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि न्यायालय को यह भी देखना चाहिए कि वर्तमान मामले में साक्ष्य कितने विश्वसनीय हैं और अभियोजन आरोप साबित करने में कितना सक्षम है। हाई कोर्ट की यह टिप्पणी न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की गुणवत्ता और जांच की निष्पक्षता के महत्व को रेखांकित करती है, जो भविष्य के मामलों में एक महत्वपूर्ण नजीर बनेगी।













