सरई रेलवे स्टेशन पर कोयले की धूल का गुबार, यात्रियों की सांसों पर संकट
कोल यार्ड से उड़ रही काली धूल से प्लेटफॉर्म और प्रतीक्षालय प्रभावित, सफाई व प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था पर उठे सवाल

सिंगरौली। स्वच्छ भारत अभियान और प्रदूषण नियंत्रण के दावों के बीच जिले के सरई रेलवे स्टेशन की स्थिति यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। स्टेशन के समीप संचालित कोल यार्ड से उड़ने वाली कोयले की काली धूल अब प्लेटफॉर्म और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच रही है। इसके चलते यात्रियों को धूल भरे वातावरण में ट्रेन का इंतजार करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों के अनुसार कोल यार्ड से उड़ने वाली धूल प्लेटफॉर्म, बैठने की जगह और प्रतीक्षालय तक जमा हो रही है। यात्रियों के कपड़े, सामान और बैठने की जगह तक काली धूल से प्रभावित हो रही है। लोगों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
सफाई व्यवस्था और धूल नियंत्रण पर सवाल
रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता और प्रदूषण नियंत्रण की बेहतर व्यवस्था होना जरूरी है। लेकिन सरई रेलवे स्टेशन परिसर में फैली कोयले की धूल को लेकर स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
नागरिकों का कहना है कि यदि स्टेशन के समीप कोल यार्ड संचालित है तो वहां से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित मानकों का पालन कराया जाना चाहिए। नियमित पानी का छिड़काव, कोयले को ढंककर रखना और परिवहन के दौरान सावधानी जैसे उपाय अपनाए जाने आवश्यक हैं।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से स्टेशन परिसर का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है।
लोगों ने मांग की है कि यदि कोल यार्ड संचालन में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और धूल नियंत्रण के प्रभावी इंतजाम सुनिश्चित किए जाएं।













