रेलवे में जन विश्वास अधिनियम 2026 लागू, छोटे अपराधों पर नहीं होगी आपराधिक कार्रवाई
यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सुगम सफर को मिलेगा बढ़ावा

जबलपुर। रेल मंत्रालय द्वारा जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम-2026 को लागू कर दिया गया है। भारतीय रेलवे में इसे एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इस कानून का उद्देश्य रेलवे अधिनियम 1989 के तहत आने वाले छोटे तकनीकी और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर यात्रियों के लिए अधिक सरल और पारदर्शी व्यवस्था तैयार करना है।
नए प्रावधानों के तहत अनजाने में होने वाली छोटी गलतियों पर यात्रियों को अब आपराधिक मुकदमे और जेल जैसी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऐसे मामलों का निपटारा प्रशासनिक जुर्माने के माध्यम से किया जाएगा। वहीं बिना टिकट यात्रा करने वालों पर सख्ती बढ़ाते हुए अतिरिक्त शुल्क को 250 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है।
रेलवे परिसरों और ट्रेनों में बिना अनुमति सामान बेचने या भीख मांगने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए 2 हजार रुपये तक का तत्काल जुर्माना निर्धारित किया गया है। इससे रेलवे कोर्ट में लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा और त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।
जबलपुर मंडल में कानून लागू होने के बाद 20 जून से 20 जुलाई 2026 तक रेलवे सुरक्षा बल द्वारा रेलवे कोर्ट में केवल 26 मामले प्रस्तुत किए गए, जबकि पहले एक माह में यह संख्या औसतन 1000 से अधिक रहती थी।
रेलवे प्रशासन का कहना है कि यह व्यवस्था यात्रियों के हित में है। इससे सफर अधिक सुरक्षित, अनुशासित और सुगम बनेगा। रेलवे ने यात्रियों से वैध टिकट लेकर यात्रा करने और नियमों का पालन करने की अपील की है।













