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गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई को: गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और ज्ञान साधना का महापर्व

56 वर्षों बाद बन रहे दुर्लभ राजयोग, गुरु पूजन से मिलेगा विशेष पुण्य : डॉ. एन.पी. मिश्र

सिंगरौली। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा पर 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषविद् एवं शिवधाम मंदिर वैढ़न के महाप्रबंधक डॉ. एन.पी. मिश्र ने बताया कि यह पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और ज्ञान साधना का प्रतीक है। इस दिन धर्मगुरु, मंत्रगुरु, शिक्षकों तथा जीवन में मार्गदर्शन देने वाले सभी गुरुजनों का पूजन एवं सम्मान करने का विशेष महत्व है।

डॉ. मिश्र के अनुसार इस वर्ष गुरु पूर्णिमा पर 56 वर्षों बाद दुर्लभ राजयोगों का संयोग बन रहा है। सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग के साथ शश एवं हंस राजयोग भी बनेंगे, जिन्हें ज्ञान, करियर, प्रतिष्ठा और सफलता के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
उन्होंने बताया कि यह पर्व महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान स्थान दिया गया है। गुरु ही शिष्य के जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर कर उसे ज्ञान, संस्कार और सदाचार का मार्ग दिखाते हैं। डॉ. मिश्र ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल पूजा का पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान, विनम्रता और मानवता के मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश देने वाला महापर्व है।

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