विरोध का अधिकार सभी को, लेकिन प्रधानमंत्री का अपमान निंदनीय : सुरेन्द्र सिंह
अभद्र टिप्पणी करने वालों पर कार्रवाई की मांग, नरेंद्र मोदी विचार मंच ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

सिंगरौली। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रति अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं है। यह बात नरेंद्र मोदी विचार मंच के रीवा संभागीय अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह एडवोकेट ने कही। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सेना, पुलिस प्रशासन एवं संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों पर वैधानिक कार्रवाई की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ विरोध प्रदर्शनों के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अमर्यादित और अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया गया, जो प्रधानमंत्री पद की गरिमा, लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़े दिल का परिचय देते हुए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने वाले छात्रों को माफ किया है, लेकिन देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री के पद का अपमान करने के पीछे यदि कोई राष्ट्र विरोधी तत्व सक्रिय हैं तो उनकी भी जांच होनी चाहिए।
सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन विरोध की भी एक मर्यादा और भाषा होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत मिशन, महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भर भारत और सीमा सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
नरेंद्र मोदी विचार मंच ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि प्रधानमंत्री एवं अन्य संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणियों पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।












