सिंगरौली मेडिकल कॉलेज अब नहीं जाएगा पीपीपी मोड पर, सरकार ने बदला फैसला

सिंगरौली। सिंगरौली के नवनिर्मित मेडिकल कॉलेज को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर संचालित करने की योजना पर अब विराम लग गया है। राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि शासन द्वारा निर्मित अथवा शासन के मद से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों का संचालन और संधारण सरकार स्वयं करेगी। इन्हें पीपीपी मॉडल पर निजी क्षेत्र को नहीं सौंपा जाएगा।

सिंगरौली मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मॉडल पर दिए जाने की खबर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इसका विरोध शुरू हो गया था। सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह, देवसर विधायक राजेंद्र मेश्राम और राज्यमंत्री राधा सिंह सहित विभिन्न स्तरों पर इस संबंध में आपत्ति जताई गई थी। मेडिकल टीचर्स एवं डीन एसोसिएशन ने भी पीपीपी मॉडल को लेकर जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा था।
देवसर विधायक राजेंद्र मेश्राम के अनुसार, मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मॉडल से अलग रखने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल के समक्ष पक्ष रखा गया था। इसके बाद शासन की ओर से स्थिति स्पष्ट करते हुए सरकारी मेडिकल कॉलेजों के संचालन को लेकर निर्णय लिया गया।
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में सिंगरौली के नए शासकीय मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण किया गया था और यहां एमबीबीएस की 100 सीटों के लिए अनुमति मिली थी।
शासन के ताजा निर्णय से सिंगरौली मेडिकल कॉलेज के संचालन को लेकर बनी असमंजस की स्थिति खत्म हो गई है। अब कॉलेज का संचालन सरकारी व्यवस्था के तहत ही किया जाएगा। इससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विद्यार्थियों तथा जिले के लोगों को आगे की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता मिली है।












