काकोरी डकैती नहीं, आजादी की लड़ाई का ‘ट्रेन एक्शन’ था : योगी
काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी समारोह का शुभारंभ, सीएम ने कहा- क्रांतिकारियों के बलिदान को कमतर आंकना देश के इतिहास के साथ अन्याय

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को काकोरी ट्रेन एक्शन शताब्दी समारोह का शुभारंभ करते हुए कहा कि काकोरी की घटना को ‘डकैती’ कहना देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले क्रांतिकारियों के बलिदान और उद्देश्य को कमतर आंकना है। उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों का लक्ष्य भारत को अंग्रेजी गुलामी से मुक्त कराना था, इसलिए इस ऐतिहासिक घटना को ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के रूप में याद किया जाना चाहिए।
सीएम योगी ने कहा कि अंग्रेजों ने काकोरी की घटना को डकैती का नाम दिया था, लेकिन स्वतंत्रता के बाद भी लंबे समय तक इसे इसी नाम से पुकारा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि काकोरी और चौरी चौरा जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं को इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिला। आजादी किसी एक व्यक्ति या विचारधारा के प्रयास से नहीं मिली, बल्कि लाखों लोगों के संघर्ष और अनेक क्रांतिकारियों के बलिदान का परिणाम थी।
उन्होंने कहा कि क्रांतिकारियों के योगदान को भुलाना युवा पीढ़ी को उसके प्रेरणास्रोतों से दूर करना है। योगी ने रानी लक्ष्मीबाई, ऊदा देवी, झलकारी बाई और अवंतीबाई लोधी जैसी वीरांगनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के अनेक नायकों को लंबे समय तक उचित सम्मान नहीं मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की गुलामी के पीछे आपसी फूट और षड्यंत्र भी जिम्मेदार रहे। आज भी जाति और क्षेत्र के नाम पर समाज को बांटने वाली ताकतें सक्रिय हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से अफवाह और भारत विरोधी दुष्प्रचार फैलाने के प्रयासों से युवाओं को सतर्क रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद स्वतंत्रता संग्राम के नायकों और शहीदों को सम्मान देने की दिशा में कार्य हुआ है। काकोरी की घटना को ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ नाम देकर क्रांतिकारियों के योगदान को सम्मान देने का प्रयास किया गया है।
योगी ने कहा कि काकोरी ट्रेन एक्शन केवल इतिहास की घटना नहीं, बल्कि युवाओं के लिए राष्ट्रभक्ति, साहस और बलिदान की प्रेरणा देने वाला अध्याय है। नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक नायकों और उनके संघर्ष से जोड़ना आवश्यक है।













