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FCRA बिल पर विपक्ष का हंगामा, डिंपल यादव बोलीं- NGO और संगठनों को निशाना बनाने की कोशिश, पारदर्शिता जरूरी

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। विपक्षी सांसदों ने विधेयक का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि इसके जरिए एनजीओ और विभिन्न संगठनों को निशाना बनाया जा रहा है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सरकार से कानून के प्रावधानों और उनके समान रूप से लागू होने को लेकर स्पष्टता की मांग की।

डिंपल यादव ने सवाल उठाया कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पंजीकृत संगठन है या नहीं। उन्होंने कहा कि कानून और नियम सभी संगठनों के लिए समान होने चाहिए और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि FCRA विधेयक के जरिए एनजीओ और विभिन्न संगठनों के तहत पंजीकृत संपत्तियों को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे लोगों में भय का माहौल बन सकता है।

अयोध्या की जमीन का मुद्दा भी उठाया

सपा सांसद ने अयोध्या में जमीन की खरीद-फरोख्त और ट्रस्ट से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन मामलों की जांच के लिए पिछले दो वर्षों से एसआईटी गठित है, लेकिन जमीन के लेन-देन को लेकर उठे सवालों का अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

उन्होंने आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ संपत्तियां कथित तौर पर वास्तविक कीमत से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं। उनके मुताबिक करीब 2 करोड़ रुपये की जमीन 16 करोड़ रुपये में और 5 करोड़ रुपये की जमीन को कथित तौर पर 25, 30 या 40 करोड़ रुपये में खरीदे जाने के आरोप सामने आए हैं। उन्होंने दान राशि में कथित अनियमितताओं और सोने-चांदी की वस्तुओं से जुड़े आरोपों का भी जिक्र करते हुए उचित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की।

सरकार के जवाब तक विपक्ष के सहयोग से इनकार

कांग्रेस सांसद चमाला किरण कुमार रेड्डी ने कहा कि विपक्ष की मांगों में बदलाव के बावजूद सरकार की ओर से जरूरी जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग थी, लेकिन अब 20 जुलाई की घटनाओं को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से संसद में स्पष्टीकरण देने की मांग की जा रही है।

रेड्डी ने कहा कि जब तक गृह मंत्री सदन में आकर इस मुद्दे पर जवाब नहीं देते, तब तक विपक्ष सरकार के साथ सदन चलाने में सहयोग नहीं करेगा और सरकार की ओर से लाए जा रहे विधेयकों में भी भागीदारी नहीं करेगा।

झारखंड छात्र आंदोलन पर भी सियासत

वहीं झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर जेएमएम सांसद महुआ माजी ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के साथ बैठक के बाद छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार किए जाने की घोषणा हुई थी और उस समय छात्रों ने भी इसे माना था। हालांकि बाद में बातचीत के बाद छात्रों ने फिर विरोध मार्च निकालने का निर्णय लिया।

महुआ माजी ने कहा कि परीक्षा रद्द करने का फैसला अदालत के निर्देश के बिना सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। उन्होंने जेपीएससी की पिछली परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक मौजूदा मामले की जांच सीआईडी कर रही है और सरकार ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट प्रक्रिया के जरिए 90 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करने का निर्देश दिया है। हालांकि छात्रों को जांच के बाद न्याय मिलने की गारंटी को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं।

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